शिरडी सांई को भगवान मानने को लेकर धर्म संसद

1शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती द्वारा शिरडी के सांई को भगवान मानकर पूजे जाने को लेकर आहूत धर्म संसद आज शिरडी ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के बहिष्कार के बीच शुरू हो गई। राजधानी रायपुर से लगभग 150 किलोमीटर दूर कवर्धा जिला मुख्यालय पर आहूत धर्म संसद में 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ देश के विभिा इलाकों के लगभग 400 साधू सन्त हिस्सा ले रहे है। इससे तमाम साधू सन्त कल ही यहां पहुंच गए थे। कवर्धा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह का गृह नगर है। धर्म संसद में भाग लेने के लिए गत 10 अगस्त को शिरडी जाकर शंकराचार्य के प्रतिनिधियों ने शिरडी ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था। उन्हें सांई को भगवान का दर्जा देने तथा भगवान मान करके उनकी पूजा करने को लेकर अपना पक्ष धर्म संसद में रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद भी उन्होंने किसी प्रतिनिधि को यहां नही भेजा। धर्म संसद शुरू होने से पूर्व कवर्धा नगर में आज भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। गाजे बाजे और धार्मिक उद्घोष के बीच निकली इस यात्रा में देश भर से जुटे साधू सन्त ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों से जुटे हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। इस यात्रा में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती भी रथ पर सवार थे। धर्म संसद को अखाड़ों के साधू सन्तों के अलावा शंकराचार्यस्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सांई को भगवान मानना शास्त्रों के खिलाफ है। इस मसले पर शंकराचार्य की ही यह राय नही है, बल्कि उनके साथ साधू सन्त और समाज भी साथ है। उन्होंने यह भी कहा कि सांई ट्रस्ट को भी बहस में हिस्सा लेने के लिए आंमत्रित किया गया था जिससे वह भी बहस में अपना पक्ष रख सके। पहले धर्म संसद तीन दिवसीय थी पर सूत्रों के अनुसार सांई ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के नहीं आने की पहले ही संकेत मिल जाने के कारण इसे दो दिवसीय कर दिया गया। शाम से शुरू हुई धर्म संसद पर कल शाम तक बहस होगी इसके बाद शंकराचार्य अपना आखिरी सम्बोधन करेंगे, जिसमें उनके द्वारा सांई के बारे में महत्वपूर्ण घोषणा किए जाने की संभावना है। धर्म संसद के लिए भव्य वाटर प्रूफ पंडाल बनाया गया है। सुरक्षा के लिए भी काफी कड़े बन्दोबस्त किए गए है। आयोजन के राजधानी से काफी दूर होने के कारण प्रशासन को भी इसके बन्दोबस्त में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। राज्य सरकार ने देश भर से जुटने वाले 23 प्रमुख साधू सन्तों को राज्य अतिथि का दर्जा दिया है।