कश्मीर में बाढ़ से डबल हुए अखरोट के दाम

1नवरात्र से पहले कुछ खास ड्राई फ्रूट्स के दाम आसमान छूने लगे हैं। जम्मू और कश्मीर में आई बाढ़ के चलते अखरोट की कीमतें थोक मार्केट में 60 से 70 पर्सेंट तक बढ़ गई है, जबकि रिटेल में यह 2 महीने पहले के रेट से दोगुनी कीमत पर मिल रहा है। केसर का प्रॉडक्शन सीजन दूर होने के बावजूद इसकी कीमतों पर भी असर दिखने लगा है। कारोबारियों का कहना है कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक होने में अभी काफी वक्त लगेगा, ऐसे में वहां के हर एग्रो प्रॉडक्ट की सप्लाई प्रभावित होगी। खारी बावली में ड्राई फ्रूट्स की होलसेल ट्रेडर परिधि ट्रेडिंग फर्म के मालिक जीके सिंह ने बताया, ‘बाढ़ से अखरोट की सप्लाई और कीमतों पर बुरा असर पड़ा है। जम्मू और कश्मीर में सालाना लगभग 50,000 टन अखरोट का उत्पादन होता है। अमेरिका और चीन के बाद यह सबसे बड़ा उत्पादक है। अनंतनाग, शोपियां और पहलगाम जिलों में इसकी खेती होती है। बाढ़ के चलते फसलों को तो नुकसान हुआ ही है, आगे सप्लाई घटने की की आशंका में मार्केट रेट बढ़ते जा रहे हैं।’ ड्राई फ्रूट्स के लिए देश के सबसे बड़े बाजार खारी बावली में 2 महीने पहले तक अखरोट 750 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर बिक रहा था, जो 1,100 से 1,500 रुपये किलोग्राम तक चला गया है। नवरात्र के दौरान अखरोट की डिमांड सबसे ज्यादा होती है, जो दिवाली तक चलती है। प्रसाद, व्रत और मिठाइयों के अलावा ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट पैक के लिए भी इसकी डिमांड आती है। इसके अलावा आयुर्वेदिक मेडिसन फर्मों की ओर से इसकी डिमांड साल भर बनी रहती है। काजू और अखरोट के होलसेलर समीर आहूजा ने बताया कि जम्मू और कश्मीर से अखरोट की सप्लाई घटने के चलते अब चीन और अमेरिका से इम्पोर्ट किया जा रहा है, जो 30-35 पर्सेंट महंगा है। उन्होंने बताया कि जम्मू और कश्मीर की ड्राई फ्रूट्स एक्सपोर्ट प्रमोशन अथॉरिटी ने संकेत दिए हैं कि राज्य के निचले इलाकों में फसल तबाह हो गई है और जिन क्षेत्रों में फसल बची है, वहां उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा। कश्मीर से सालाना करीब 7,000 टन अखरोट एक्सपोर्ट होता है, जो वहां कि इकॉनमी में बड़ी हिस्सेदारी रखता है।