वाे मरता रहा अफसर तालियां पीटते रहे

स्थान ग्रीनपार्क स्टेडियम का गेट नंबर-10, समय-सुबह 8:45 बजे, जिला प्रशासन की मतदाता जागरूकता रैली के लिए जिले के कई विभागों के आला अफसर स्टेडियम के अंदर मौजूद थे, सैकड़ों लोग भी थे, मातहतों की फौज, नीली बत्ती लगी गाड़ियों की कतारें भी थीं, जिला अस्पताल उर्सला सिर्फ एक किलोमीटर दूर लेकिन खून से लथपथ एक घायल 36 मिनट तक गेट नंबर-10 पर तड़पता रहा। कोई उसे अस्पताल ले जाने वाला नहीं था। अंदर कई अफसर तालियां पीट रहे थे ताे बाहर एडीएम सिटी जैसे आला अफसर फोन पर फोन करते रहे लेकिन 108 एंबुलेंस का फोन ही नहीं उठा। सिपाही दौड़ाए, गनर से फोन कराया, थाने फोन घनघनाया तब जाकर 9.21 बजे मौके पर एंबुलेंस आई, तब तक घायल का काफी खून बह चुका था। एंबुलेंस में रखकर एक किलोमीटर दूर उर्सला ले गए लेकिन वहां डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया, बला टालने के लिए करीब 6 किलोमीटर दूर हैलट रेफर कर दिया। हैलट में मृत घोषित कर दिया गया। गरीब था बेमौत मर गया। इसी के साथ स्मार्ट सिटी, मेट्रो सिटी आदि-आदि का ख्वाब देख रहे शहर में सड़ चुकी सरकारी व्यवस्थाओं की भी मौत हो गई।

सिलेंडर फटा, बुजुर्ग की मौत
फजलगंज के प्रकाश विद्या मंदिर हाता निवासी शिवलखन (60) के परिवार में पत्नी कमला देवी, पांच बेटियां बुद्धशीला, लक्ष्मी, किरण, चांदनी, रोशनी और बेटा बुद्ध सागर हैं। बुद्धशीला के अलावा सभी अविवाहित हैं। शिवलखन गुमटी नंबर पांच स्थित गुरु गोविंद सिंह चौक के पास गुब्बारे बेचकर परिवार का पेट पालता था। बेटे ने बताया कि पिता को ग्रीनपार्क स्टेडियम में आयोजित मतदाता जागरूकता रैली के लिए गैस के गुब्बारे लगाने का आर्डर मिला था। पिता, मां और छोटी बहन चांदनी (14) हीलियम गैस सिलेंडर और गुब्बारे लेकर ग्रीनपार्क गए थे। गेट नंबर-10 के पास खड़े होकर पिता गुब्बारों में गैस भर रहे थे। मां गुब्बारों के गुच्छे बना रही थी। चांदनी गुब्बारों को ग्रीनपार्क में रेलिंग में बांध रही थी। सुबह करीब 8:45 बजे सिलेंडर अचानक फट गया। इसकी चपेट में आकर माता-पिता घायल हो गए। शिवलखन के पेट में गंभीर जख्म हुए, मां उछल कर दूर जा गिरी। काफी देर तक दोनों को होश नहीं रहा। बाद में घायल शिवलखन सड़क पर पड़ा तड़पता रहा। जान बचाने के लिए गुहार लगाता रहा।

फोन पर फोन, कोई आगे नहीं आया
माता-पिता की हालत देखकर गुब्बारे लगा रही बेटी बदहवास हो गई। कभी मां को संभालती, कभी पिता के पास जाकर रोती। 8.51 बजे एटीएम सिटी केपी सिंह मौके पर आ गए, तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन मिलाया, फोन उठा ही नहीं। भीड़ जुटने लगी, 8.56 बजे गनर से फोन करने को कहा, फिर कोतवाली फोन मिलाया, तब तक घायल का काफी खून बह चुका था। कई गाड़ियां आस-पास खड़ी थीं लेकिन किसी ने घायल को अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई।

बेटी बदहवास, कोई नहीं पास
माता-पिता की हालत देखकर बेटी बदहवास हो गई थी, 9.01 बजे मां को संभालने में लगी। 9.10 बजे कुछ वालेंटियर आए और मां को गोद में उठाकर अस्पताल ले जाने लगे। एंबुलेंस अभी भी नहीं आई। 9.12 बजे बेटी भागकर पिता के पास पहुंची, पिता ने पानी मांगा तो उनके मुंह में पानी डाला। तब तक न कोई अफसर उसके पास पहुंचा और न ही अपनी गाड़ी से अस्पताल भेजा। 9.14 बजे किसी ने सफेद चादर लाकर सड़क पर पड़े पिता पर डाल दी। 9.19 पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी आई।

उर्सला से हैलट टरकाया
सबसे बाद में 9.21 बजे एंबुलेंस आई फिर शिवलखन को एक किलोमीटर दूर उर्सला ले गए लेकिन वहां इलाज नहीं किया गया, कहा हैलट बड़ा सेंटर है, वहां ले जाओ। उर्सला से हैलट करीब 6 किलोमीटर दूर है। रास्ते में करीब आधा घंटा और लग गया। हैलट में डॉक्टर साहब तक पहुंचने, डॉक्टर साहब के चेक करने तक बहुत देर हो चुकी थी, शिवलखन मर चुका था।

अधिक खून बहने से मौत
पुलिस ने शिवलखन के शव को पोस्टमार्टम हाउस और मां को उर्सला भिजवाया। पोस्टमार्टम में शिव लखन के दाहिनी जांघ, पेट के दाहिनी तरफ नीचे, दाहिने हाथ के कंधे के नीचे और कोहनी एवं कलाई के बीच चोट मिली है। अधिक खून बहने से मौत की पुष्टि हुई है।

फजलगंज में परिजनों का हंगामा
हादसे का शिकार शिवलखन के परिजनों ने मुआवजे के लिए पोस्टमार्टम हाउस और फजलगंज में हंगामा किया। पुलिस मौके पर पहुंची और मदद दिलाने का भरोसा देकर लोगों को शांत कराया।

परिवार के सामने दो जून की रोटी की दिक्कत
शिवलखन की मौत से परिवार के सामने रोटी की संकट पैदा हो गया है। शिवलखन की कमाई से ही परिवार का पेट पलता था। बेटे बुद्ध सागर ने कहा कि रोटी के लाले हैं, मां का इलाज कैसे कराएंगे। समझ नहीं आ रहा।

घायल महिला को यूपी डॉयल-100 की गाड़ी से अस्पताल भेजा था। घायल पति की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे पुलिस गाड़ी से अस्पताल ले जाया जा सके। इसलिए एंबुलेंस का इंतजार किया गया।
राजेंद्रधर द्विवेदी, सीओ, कोतवाली

36 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंचने की बात गलत है। ग्रीनपार्क से 108 एंबुलेंस को सुबह 8:49 बजे कॉल की गई। 8:55 बजे एसीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव की कॉल भी आई। उर्सला से 9:01 बजे एंबुलेंस भेजी गई थी, पर तब तक गुब्बारे वाले की मृत्यु हो गई थी। उसे तुरंत उर्सला फिर हैलट ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया।
अजय यादव, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, 108 एंबुलेंस