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आज रायबरेली में चुनाव प्रचार में उतरेंगी प्रियंका गांधी, राहुल गांधी के साथ करेंगी रैली को संबोधित

उतर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन शुक्रवार को प्रियंका गांधी कांग्रेस का चुनाव प्रचार करेंगी। प्रियंका गांधी कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ रायबरेली में चुनावी रैली में हिस्सा लेंगी। जहां पर वे रैली को संबोधित करेंगी। 

राहुल गांधी की रायबरेली के इंटर काँलेज ग्राउंड पर दोपहर तीन बजे सभा होनी है। इसके बाद राहुल गांधी का दूसरा कार्यक्रम रायबरेली के महाराजगंज में बाबुरिया ग्राउंड पर शाम साढ़े चार बजे है। इस बार उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी की ये पहली सभा होगी। 

प्रियंका गांधी को प्रदेश में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार की मांग कर्इ बार उठ चुकी हैं। इस बार एेसी चर्चाएं थीं कि प्रियंका गांधी रायबरेली और अमेठी के साथ ही उत्तर प्रदेश के कर्इ अन्य क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करेंगी, लेकिन प्रियंका गांधी ने अन्य क्षेत्रों से अब तक दूरी बनाए रखी है। हालांकि अब वे रायबरेली में चुनाव प्रचार करती नजर आएंगी।

हम आपको बता दें कि अमेठी राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है तो रायबरेली सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र है। दोनों की व्यवस्थाओं के चलते प्रियंका गांधी हमेशा से ही यहां पर कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करती रही हैं। 

बनी सहमति, छात्रों का अनशन खत्म

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति के खिलाफ चल रहा छात्रों का अनशन बृहस्पतिवार को खत्म हो गया। इविवि प्रशासन और छात्रों की ओर से एक-दूसरे पर की गई एफआईआर वापस लेने की लिखित सहमति बनी। इविवि प्रशासन ने छात्रों को आश्वस्त किया कि आंदोलन के दौरान उनकी ओर से उठाई गई सभी मांगें पूरी कर दी गईं हैं और इस दौरान आंदोलित छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अनशनकारी छात्रों से बृहस्पतिवार को इविवि प्रशासन की ओर से प्रॉक्टर प्रो. हर्ष कुमार, डीएसडब्ल्यू प्रो. आरकेपी सिंह, ऑटा अध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे, प्रो. आरके चौबे ने वार्ता की। इस दौरान प्रशासन की ओर से एसपी सिटी विपिन टाडा, एसीएम आशीष मिश्र भी मौजूद रहे। अधिकारियाें ने अनशनकारी छात्रों अदील हमजा, नीरज प्रताप सिंह, अनुभव उपाध्याय, अनुभव सिंह, आशुतोष पाठक, जितेंद्र कुमार बिंद, अनुज शुक्ल को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया।

छात्रों की मांग पर कुलपति ने पूर्व गठित प्रवेश समिति को भंग करने के साथ स्थाई कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया। छात्रों को बताया गया कि 15 अप्रैल के भीतर नियुक्ति पूरी कर ली जाएगी। प्रवेश परीक्षा में ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन का भी विकल्प होगा। पुस्तकालय से छात्रों को 20 मार्च से किताबें जारी की जाएंगी।

इस आशय का लिखित आश्वासन छात्रों को रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ल ने दिया। अनशन खत्म होने के बाद अध्यक्ष रोहित मिश्र एवं उपाध्यक्ष अदील हमजा ने कहा कि छात्र हितों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। कहा कि छात्रों ने अपनी एकजुटता के बल पर विवि प्रशासन से अपनी मांगें मनवाईं। छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने कहा कि उनकी ओर से विवि पर की गई एफआईआर वापस ली जाएगी। विवि भी छात्रों पर लगाए आरोप वापस लेगा और किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

इस महिला ने डॉन अतीक को किया था नाकों चने चबाने पर मजबूर

जरायम की दुनिया से सूबे की सियासत में पैठ बनाने वाले बाहुबलियों का लंबी फेहरिस्त है। इलाहाबाद और आसपास के इलाकों में दबदबा रखने वाला अतीक अहमद उनमें से एक है। वह शायद इकलौता सांसद है जिसे भगोड़ा घोषित किया गया था।

पांच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके अतीक का दबदबा और रुतबा तब घटने लगा जब एक महिला से चुनाव हार गए थे । 2005 में बसपा के तत्कालीन विधायक राजू पाल की हत्या हुई तो अतीक मुख्य आरोपी बनाया गया।

जानकारी के मुताबिक पूजा पाल एक अस्पताल में सफाई का काम करती थीं। अस्पताल में ही उनकी राजू पाल से पहली मुलाकात हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और राजू पाल ने उनसे 2005 में शादी की। विधायक चुने जाने के चार महीने बाद ही राजू पाल की दिन दहाड़े हत्या हो गई। पूजा से उनकी शादी को सिर्फ नौ महीने बीते थे।

17 साल की उम्र में ही दर्ज हो गया था पहला मुकदमा


अतीक अहमद (फाइल फोटो)
सत्ता बदली तो राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने उसको नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया। हालत यह हो गई कि अतीक को इलाहाबाद छोड़ कर भागना पड़ा और नए सियासी ठिकाने की तलाश करनी पड़ी।

बालिग होने से पहले ही महज 17 साल में अतीक पर पहला मुकदमा हुआ, वो भी हत्या का। इसके बाद अतीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक समय ऐसा भी आया जब अतीक पर उसकी उम्र से ज्यादा मुकदमे थे।

1990 और 2000 के दशक में अतीक ने सरकारी ठेके हासिल करने, जबरन वसूली के लिए अपहरण और हत्या की घटनाओं को अंजाम देकर दहशत कायम कर दी। देखते ही देखते इलाहाबाद और आसपास के जिलों में अतीक का खौफ कायम हो चुका था।

गेस्ट हाउस कांड में भी था अतीक का नाम


अतीक अहमद (फाइल फोटो)
1992 में इलाहाबाद पुलिस ने पहली बार अतीक अहमद का कच्चा चिट्ठा जारी किया, जिसमें बताया गया था कि अतीक अहमद के खिलाफ लखनऊ, कौशांबी, चित्रकूट, इलाहाबाद के साथ-साथ बिहार में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली मामले दर्ज हैं।

सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद में दर्ज हुए। अतीक पर जिस रफ्तार से मुकदमे कायम हो रहे थे, उसी रफ्तार से जरायम की दुनिया में उसका कद बढ़ रहा था। कई ऐसे मौके आए जब अतीक को सत्ता की ताकत का एहसास हो चुका था।

1989 में अतीक ने सियासत का रुख किया और यहां भी धमाकेदार इंट्री की। निर्दल प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस उम्मीदवार को मात देकर सीधे विधानसभा जा पहुंचा। 1991 और 1993 में भी अतीक निर्दल चुनाव लड़ा और विधायक बना।

1993 में विधान सभा चुनाव में सपा-बसपा की सरकार बनी तो अतीक भी मुलायम के साथ आ गया। 2 जून 1995 को मायावती के साथ हुए गेस्ट हाउस कांड में भी अतीक का नाम आया था।

मुलायम सरकार में मस्त और मायावती सरकार में पस्त रहा अतीक


मीड‌िया से मुखात‌िब अतीक
1996 में समाजवादी पार्टी ने अतीक को टिकट दे दिया और वह लगातार चौथी बार विधायक बन गया। सपा का साथ ज्यादा दिन का नहीं रहा। 1999 में अतीक ने सोने लाल पटेल का साथ पकड़ लिया और अपना दल के टिकट पर संसद जाने का ख्वाब देखने लगा।

चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा लेकिन 2002 में अपना दल के टिकट पर चुनाव जीतकर लगातार पांचवी बार विधायक बना। 2003 में जब यूपी में सपा सरकार बनी तो अतीक ने फिर से मुलायम सिंह का हाथ पकड़ लिया। 2004 में अतीक का लोकसभा पहुंचने का ख्वाब भी पूरा हो गया।

वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर फूलपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा पहुंच गया। खाली हुई विधानसभा सीट पर अतीक के भाई अशरफ चुनाव मैदान में उतरा लेकिन उसे बसपा के राजू पाल ने हरा दिया।

विधायक बनने के कुछ ही दिनों बाद विधायक राजू पाल को 25 जनवरी 2005 को इलाहाबाद में दिनदहाड़े गोली से छलनी कर दिया गया। आरोप अतीक और उनके भाई अशरफ पर लगा।

समय बदला और सूबे में सरकार बदली तो अतीक के हौसले पस्त होने लगे। मायावती के जेहन में गेस्ट हाउस कांड के जख्म हरे थे। अतीक के सारे मामले खुलने लगे और एक के बाद एक इलाहाबाद में कई मुकदमे दर्ज हो गए। इस दौरान अतीक वह भूमिगत हो गया। पार्टी की बदनामी होने लगी तो मुलायम ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

वांटेड एमपी बन गया था माफ‌िया अतीक


अतीक अहमद समर्थकों के साथ
गिरफ्तारी के डर से सांसद अतीक फरार था। उसके घर, कार्यालय सहित पांच स्थानों की संपत्ति न्यायालय के आदेश पर कुर्क की जा चुकी थी। 2007 के आखिर तक अतीक अहमद की गिरफ्तारी पर पुलिस ने बीस हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया और पूरे देश में अलर्ट जारी किया गया था।

अतीक अहमद ने दिल्ली पुलिस के सामने आत्म समर्पण कर दिया और मायावती से अपनी जान को खतरा बताया। अतीक के बुरे दिन शुरू हो चुके थे। पुलिस और विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने अतीक अहमद की एक खास परियोजना अलीना सिटी को अवैध घोषित करते हुए उसका निर्माण ध्वस्त कर दिया था।

ऑपरेशन अतीक के तहत ही 5 जुलाई, 2007 को राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल ने अतीक के खिलाफ धूमनगंज थाने में अपहरण और जबरन बयान दिलाने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद चार अन्य गवाहों की ओर से भी उनके खिलाफ मामले दर्ज कराए गए थे।

दो माह के भीतर ही अतीक अहमद के खिलाफ इलाहाबाद में 9, कौशांबी और चित्रकूट में एक-एक मुकदमा दर्ज किया गया था। 2012 में सपा की सरकार बनी तो अतीक के दिन फिर बहुरने लगे।

कुछ ही दिन में जमानत मिल गई और वह बाहर आकर सपा में शामिल हो गए । 2014 में सपा ने उनके गृह जनपद श्रावस्ती से टिकट दिया जिसमें वह बुरी तरह से हार गए।
पूजा पाल की वजह से छोड़ना पड़ गया था इलाहाबाद


पूजा पाल की शादी की फाइल फोटो
इलाहाबाद में अतीक की तूती बोलती थी। लेकिन राजू पाल की हत्या के बाद जब बसपा सरकार आई तो पूजा पाल दोबारा विधायक बनीं। पूजा पाल ने अतीक की नाक में इतना दम किया कि जिस सीट पर पांच बार विधायक रह चुका था, उस सीट को ही नहीं इलाहाबाद जिले को भी छोड़कर भागना पड़ा।

2014 के चुनाव में अतीक को अपने गृह जनपद श्रावस्ती जाकर चुनाव लड़ना पड़ा। 2017 में अतीक एक बार फिर विधायक बनने के लिए अतीक सक्रिय हुआ। सपा में झगड़े से पहले शिवपाल यादव की लिस्ट में उसे कानपुर की कैंट सीट से प्रत्याशी बनाया।

अखिलेश ने उसका टिकट काट दिया। इसी दौरान इलाहाबाद में शियाट्स में मारपीट के मामले में फिर उसका नाम सुर्खियों में आया। मामला अदालत में पहुंचा। कोर्ट के सख्त रुख के कारण उसे सरेंडर करना पड़ा।

हत्या, अपहण, गुंडा एक्ट के मुकदमें दर्ज हैं अतीक पर


फा‌इल फोटो
सपा में झगड़े से पहले शिवपाल यादव की लिस्ट में उसे कानपुर की कैंट सीट से प्रत्याशी बनाया। अखिलेश ने उसका टिकट काट दिया। इसी दौरान इलाहाबाद में शियाट्स में मारपीट के मामले में फिर उसका नाम सुर्खियों में आया। मामला अदालत में पहुंचा। कोर्ट के सख्त रुख के कारण उसे सरेंडर करना पड़ा।

अतीक अहमद पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, शांति व्यवस्था भंग करने, थानाध्यक्ष के साथ मारपीट करने, लाइसेंसी शस्त्र के दुरुपयोग, गुंडा एक्ट, होटल मालिक के साथ मारपीट, शस्त्र निरस्तीकरण के बाद भी जमा न करने, जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप में गंभीर धाराओं में मुकदमे कायम हुए हैं।

वीसी के खिलाफ अनशन जारी, समर्थन में भी अभियान

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। रजिस्ट्रार तथा सुरक्षा सलाहकार को हटाने की मांग को लेकर अब भी गतिरोध बना हुआ है। छात्रसंघ के बैनर तले सात छात्रों का बेमियादी अनशन तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। अध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर रामसेवक दुबे तथा अन्य शिक्षकों ने आंदोलनकारी छात्रों से वार्ता की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अफसरों की नियुक्ति, लाइब्रेरी से किताबें निर्गत करने की तारीख भी तय कर दी, लेकिन छात्र पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ कुलपति के समर्थन में भी छात्रों का अभियान जारी रहा।
प्रोफेसर दुबे के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को फिर मांग माने जाने का लिखित आश्वासन दिया। रजिस्ट्रार ने लिखकर दिया कि 15 अप्रैल तक कुलसचिव, वित्त अधिकारी और परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति कर ली जाएगी। उन्होंने यह भी लिखकर दिया कि 20 मार्च से लाइब्रेरी से किताबें निर्गत की जाएंगी। प्रोफेसर दुबे के साथ चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार तथा अन्य शिक्षक भी छात्रों से वार्ता के लिए छात्रसंघ भवन पर पहुंचे थे।

चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार ने भी आश्वासन दिया कि आत्मदाह करने वाले जाबिर रजा पर से मुकदमा वापस लिया जाएगा। इसके बाद भी अनशनकारी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। वे प्रोफेसर एनके शुक्ला को रजिस्ट्रार के पद से हटाकर किसी संयुक्त कुलसचिव को चार्ज देने तथा छात्र एवं सुरक्षा सलाहकार प्रोफेसर माता अंबर तिवारी को हटाए जाने की मांग पर अड़े थे। छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा का कहना था कि अन्य मांगों पर उनकी सहमति बन गई है। इन दोनों मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन सहमत हो जाए तो अनशन खत्म कर दिया जाएगा।

छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा का कहना था कि जब तक रजिस्ट्रार और सुरक्षा सलाहकार को हटा नहीं दिया जाता उनका आंदोलन जारी रहेगा। अदील के अलावा अनशन करने वाले अन्य छात्र नीरज प्रताप सिंह, अनुभव उपाध्याय, अनुभव सिंह, आशुतोष पाठक, जितेंद्र कुमार बिंद और अनुज शुक्ल हैं। अनशन के समर्थन में भीम सिंह चंदेल, जिया कौनेन रिजवी, विश्वदीपक, विवेकानंद पाठक, अखिलेश गुप्ता, विक्रांत सिंह, अभिषेक तिवारी, सीएमपी छात्रसंघ के अध्यक्ष विशाल सिंह, हरिनाम सिंह आदि ने आंदोलन का समर्थन किया।

दिल्ली से लौटे ब्रजेश सक्सेना, संजय पांडेय, पवन यादव ने बताया कि मोहम्मद जाबिर रजा की तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। छात्र युवा संघर्ष समिति के सूरज सिंह, अंजनी कुमार मिश्र आदि ने छात्रसंघ के आंदोलन का भी समर्थन किया।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के समर्थन में बुधवार को भी छात्रों ने परिसर में जुलूस निकाला। एयू स्टूडेंट फोरम के बैनर तले उन्होंने कुलपति के समर्थन में जनसंपर्क अभियान भी चलाया। यूपी रिसर्च एसोसिएशन की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री से मिलकर कुलपति की उपलब्धियों को उनके सामने रखे जाने की घोषणा की गई।
फोरम के बैनर तले छात्र परिसर में जुलूस निकालते हुए कुलपति दफ्तर पर पहुंचे। वे ‘सेव विश्वविद्यालय सेव वीसी’ का नारा लगाते हुए चल रहे थे। छात्रों ने छात्रसंघ को बंद करने की भी मांग उठाई। छात्रों का कहना था कि कुलपति को मंत्रालय की जांच में भी क्लीन चिट दे दी गई है।

इस खुशी में उन्होंने गुलाल-अबीर भी उड़ाए। जुलूस में सर्वेश सिंह, नीरज सिंह, कमल किशोर उपाध्याय, निखलेश मिश्रा आदि शामिल रहे। यूपी रिसर्च एसोसिएशन की बैठक में भी कुलपति के फैसलों का समर्थन किया गया। सदस्यों ने छात्रसंघ के बैनर तले जारी आंदोलन के औचित्य पर सवाल उठाया। बैठक में निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मानव संसाधन विकास मंत्री से मिलेगा और कुलपति की उपलब्धियों से उन्हें अवगत कराएगा। बैठक में डॉ.वशिष्ठ नारायण शुक्ल, राजेश शुक्ल, आरपी मिश्र, डॉ.विनोद शुक्ला, डॉ.वीसी चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।

अखिल भारतीय स्तर पर होने वाले सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन इंट्रेस टेस्ट में शामिल होने के इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि इससे विश्वविद्यालय में पठन-पाठन का माहौल बिगड़ेगा। उनका यह भी कहना था कि कॉमन इंट्रेस टेस्ट से देश के सभी बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान बाहर हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉमन इंट्रेस टेस्ट में शामिल होने का प्रस्ताव मंगलवार को परीक्षा कराने वाली संस्था राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय को भेज दिया है।

बिहार की सिवान जेल से अब तिहाड़ जेल भेजे जाएंगे शहाबुद्दीन

बिहार के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को बिहार के सिवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने पर मुहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने राइट टू फेयर ट्रायल के तहत ये आदेश दिए हैं। मीडिया की खबरों के मुताबिक शहाबुद्दीन को एक हफ्ते के अंदर दिल्ली लाया जाएगा।
हालांकि, शहाबुद्दीन की ओर से कहा गया कि अगर उन्हें शिफ्ट किया जाता है तो इससे उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा। बता दें कि याचिका चंद्रशेखर और आशा रंजन की ओर से शहाबुद्दीन को दूसरे राज्य की जेल में शिफ्ट करने की याचिका दायर की गई थी।

इनके मुताबिक शहाबुद्दीन से लोगों को खतरा है इसलिए उन्हें जल्द से जल्द शिफ्ट किया जाए। दरअसल, चंद्रकेश्वर प्रसाद की तीन बेटों की हत्या हुई थी जिनका आरोप शहाबुद्दी पर लगा हुआ है। साथ ही आशा रंजन के पति राजदेव रंजन की हत्या में भी शहाबुद्दीन के शामिल होने का आरोप है।

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Supreme Court orders to shift Mohammad Shahabuddin from Siwan (Bihar) to Tihar Jail, Delhi
10:42 AM – 15 Feb 2017
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आम कैैदियों की तरह ही रखा जाए शहाबुद्दीन को

शहाबुद्दीन के मामले में सख्ती बरतते हुए कोर्ट ने और भी कई निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई तिहाड़ से ही होगी। इसके लिए शहाबुद्दीन को बिहार लाने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए ही आगे की कार्रवाई की जाए।

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Supreme Court orders to shift Mohammad Shahabuddin from Siwan (Bihar) to Tihar Jail, Delhi
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ANI ✔ @ANI_news
SC ordered to shift Mohammad Shahabuddin from Siwan (Bihar) to Delhi’s Tihar Jail & ordered to conduct the trial through video conferencing
11:00 AM – 15 Feb 2017
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इतना ही नहीं कोर्ट ने कहा कि शहाबुद्दीन को तिहाड़ में किसी भी तरह की स्पेशल सुविधा नहीं दी जाए। उन्हें आम कैदियों की तरह ही रखा जाए।

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SC ordered to shift Mohammad Shahabuddin from Siwan (Bihar) to Delhi’s Tihar Jail & ordered to conduct the trial through video conferencing
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SC orders to shift Mohammad Shahabuddin from Siwan (Bihar) to Delhi’s Tihar Jail and that no special treatment is to be given to him.
11:08 AM – 15 Feb 2017 · New Delhi, India
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बता दें कि शहाबुद्दीन हत्या, रंगदारी, किडनैपिंग और तेजाब कांड के लिए कुख्यात रहे। उन्हें पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद जमानत मिली थी। 16 अगस्त 2004 को सीवान के गोशाला रोड में रहने वाले कारोबारी चंद्रकेश्वर प्रसाद के दो बेटों सतीश और गिरीश का अपहरण हुआ था। चंद्र बाबू की पत्नी कलावती देवी के बयान के बाद जांच में शहाबुद्दीन का नाम सामने आया।

इसके बाद किडनैप हुए सतीश और गिरीश के बड़े भाई राजीव रोशन ने अपनी गवाही में खुलासा किया था कि शहाबुद्दीन की मौजूदगी में उसके दोनों भाइयों को तेजाब में डूबोकर मार डाला गया था।

शहाबुद्दीन नवंबर 2005 से जेल में बंद थे। हाईकोर्ट के आदेश पर शहाबुद्दीन के खिलाफ मामले की सुनवाई शुरू हुई। इसी बीच, 16 जून 2014 को अहम गवाह राजीव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसमें शहाबुद्दीन और उनके बेटे ओसामा आरोपी हैं।

ये है अखिलेश की फायर ब्रान्ड नेता, चंद दिनों में छा गई

दिल्ली की ये लड़की अखिलेश की फायर ब्रान्ड नेता बन चुकी है। चंद दिनों में ही इस लड़की ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है। डॉक्टर दंपति की इस बेटी का नाम है पंखुड़ी पाठक। पंखुड़ी नॉन पॉलि‍टि‍कल बैकग्राउंड से हैंं और समाजवादी पार्टी की यूथ कोर कमेटी का बड़ा चेहरा बन चुकी हैं।

दिल्ली में रहने वाली 25 साल की पंखुड़ी पाठ का कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं है। उनके पिता जेसी पाठक और मां आरती पाठक डॉक्टर हैं और दिल्ली में ही प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। पंखुड़ी का छोटा भाई चिराग पाठक अभी ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है।

स्टूडेन्ट लीडर पंखुड़ी पाठक लंबे समय से समाजवादी पार्टी की छात्र सभा से जुड़ी रही हैं। साल 2010 में हंसराज कॉलेज के चुनाव में उन्होंने ज्वाइंट सेक्रेटरी पद का चुनाव जीता। उस समय इनकी उम्र करीब 18 साल थी। उन्होंने 2 से 3 साल तक पार्टी की तरफ से प्रत्याशि‍यों को छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ाया। दिल्ली में ये चर्चित छात्र नेता हैं।

पंखुड़ी पाठक समाजवादी पार्टी के साथ अखि‍लेश यादव और उनकी वाइफ डिंपल यादव से काफी प्रभावि‍त हैं। पंखुड़ी सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं। फेसबुक पर भी उनके हजारों फॉलोवर हैं।

पंखुड़ी को समाजवादी पार्टी की कोर टीम में शामि‍ल करने के पीछे अखिलेश यादव का युवाओं को बढ़ावा देना उद्देश्य है। टीवी चैनलों से लेकर सामाजि‍क फोरम पर सपा के युथ विंग के लोग पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सकें। इसी लिहाज से सपा उन्हें बढ़ावा दे रही है।

दरअसल सपा का सोशल मीडिया कैंपेन संभालने के लिए अब ऐसे प्रोफेशनल्स की टीम का गठन किया गया है, जिनमें बीबीसी जैसे संस्थानों में काम किए लोग भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पूरी तरह से डिंपल ही संभाल रही हैं।

दूसरी शादी कर रहा था युवक, क्या हुआ जब सामने आ गई पहली पत्नी

लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में रविवार रात पत्नी को तलाक दिए बिना ही दूसरा ब्याह रचाने जा रहे दूल्हे को लेने के देने पड़ गए। पहली पत्नी को भनक लगी तो उसने गेस्ट हाउस पहुंचकर हंगामा किया।
पुलिस को आता देख दूल्हा स्टेज से कूदकर भाग निकला। इस बीच बाराती भी वहां से खिसक लिए। पुलिस ने शादी रुकवा दी। वधू पक्ष ने युवक पर धोखाधड़ी करके दूसरा ब्याह रचाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।

पुलिस के मुताबिक, आलमबाग विशेश्वर नगर निवासी अभिषेक तिवारी ने 2014 में कानपुर की रहने वाली युवती से हिंदू रीति रिवाज से शादी की थी। महिला का आरोप है कि शादी के बाद ससुराल आने पर सास ने उसके जेवर अपने पास रख लिए।

इसके बाद दहेज में आठ लाख रुपये न लाने पर उसकी बेरहमी से पिटाई करके खदेड़ दिया। किसी तरह महिला कानपुर पहुंची और घरवालों को आपबीती बताई। महिला ने पति समेत ससुरालीजनों पर दहेज प्रताड़ना व मारपीट समेत गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवाद कोर्ट में विचाराधीन था।

इस बीच अभिषेक तिवारी के घरवालों ने पीजीआई इलाके की रहने वाली युवती से दूसरा ब्याह तय कर दिया। शनिवार को युवक की दूसरी शादी की तैयारियां चल रही थी। वृंदावन के गेस्ट हाउस में बारात पहुंच गई। इसकी जानकारी पहली पत्नी को लगी तो वह मामले की शिकायत लेकर थाने पहुंची।

महिला एसएसआई बलवंत शाही फोर्स संग गेस्ट हाउस पहुंचे तो वहां अफरातफरी मच गई। पहली पत्नी को देखकर दूल्हा स्टेज से कूदकर भाग निकला। वहीं, बाराती भी धीरे-धीरे वहां से भाग निकले।

पुलिस ने दूल्हे के भाई को हिरासत में लेकर थाने आई है। लड़की वालों ने युवक पर धोखे से दूसरा ब्याह रचाने का आरोप लगाते थाने में तहरीर दी है। इंस्पेक्टर जैनुद्दीन अंसारी ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।

शर्मनाक: युवती के साथ गैंगरेप करके, वीडियो किया वायरल

बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र में एक किशोरी के साथ हुए गैंगरेप के वीडियो को आरोपियों ने फेसबुक व व्हाट्सएप के माध्यम से सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
वीडियो वायरल होते ही ये मामला चर्चा में आ गया। पुलिस ने मामले में चार युवकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी जिनमें से तीन आरोपी जेल जा चुके है। एसपी ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई करने की बात कही है।

सुबेहा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 17 साल की एक लड़की 7 फरवरी को घास काटने के लिए अपने खेत गई थी। उसे वहां से अगवा कर अमेठी जिले के थाना शिवरतनगंज क्षेत्र के इन्हौना गांव के रहने वाले युवकों ने गैंगरेप किया था।

पुलिस ने इस मामले में फैजल पुत्र राजू, रिजवान पुत्र चन्दा, गुफरान पुत्र नईम व मोनू पुत्र मतीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। पीडि़ता ने पुलिस को बताया कि फैजल व रिजवान ने उसके साथ दुराचार किया व मोनू व गुफरान ने अपने मोबाइल में रेप का वीडियो बनाया उसके बाद उसे फेसबुक व व्हाट्सएप के माध्यम से सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

पीडि़ता ने 10 फरवरी को इस मामले की शिकायत पुलिस से की थी जिस पर पुलिस ने इन चारों आरोपियों के खिलाफ दुराचार, आईटीएक्ट समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने 10 फरवरी की रात ही गुफरान को गिरफ्तार किया था।

वहीं दो आरोपी रिजवान व फैजल को पुलिस ने सोमवार को हैदरगढ़ बस अड्डे के समीप से पकडऩे का दावा किया है। जबकि एक आरोपी मोनू अभी पुलिस पकड़ से दूर है। एसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि सभी चारों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई करने की बात कही है। वहीं फरार आरोपी को पकडऩे के लिए पुलिस टीम प्रयास कर रही है।

फटने वाला है अमेरिका का सबसे ऊंचा बांध, लाखों लोगों को हटाया

अमेरिका के उत्तरी कैलिफोर्निया में ओरविल के पास सबसे बड़ा बांध फटने की कगार पर है। बांध के पास बड़ी संख्या में भारतवंशी लोग रहते हैं। बांध के डैमेज होने के बाद आपातकाल स्थिति में आसपास के रिहायशी इलाकों को खाली कराया जा रहा है।
खबरों के मुताबिक कैलीफॉर्निया के यूबा शहर में क्षतिग्रस्त ओरविल बांध के टूटने के डर से 1 लाख 30 हजार लोगों को आसपास के इलाकों से हटाया गया है। बांध के आसपास के इलाके में 13 फीसदी भारतीय मूल के लोग रहेत हैं।

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक बांध में एक बड़ा छेंद हुआ है। अब इसके टूटने के आसार हैं। खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों को वहां से हटाना शुरू कर दिया है।

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USA: Emergency evacuation of Yuba City & areas in Sutton County as there is danger that the damaged Oroville Dam could burst.
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USA: Large population in areas being evacuated is that of Indian origin Americans, appx 13% is of Punjabis/Sikhs #YubaCity #OrovilleDam

मोबाइल दुकान पर बमबाजी, फार्मासिस्ट जख्मी

इलाहाबाद : टैक्सी स्टैंड के करीब स्थित मोबाइल फोन की एक दुकान पर रविवार शाम ताबड़तोड़ बमबाजी होने से दहशत फैल गई। इससे दूसरी दुकान पर मौजूद फार्मासिस्ट धर्मेन्द्र सिंह जख्मी हो गया। घटना स्थल से थोड़ी दूर पर भाजपा-अपना दल गठबंधन प्रत्याशी प्रमिला त्रिपाठी का चुनाव कार्यालय था। कुछ लोगों ने कार्यालय पर हमले का हल्ला मचा दिया तो खलबली मच गई। घटना के पीछे रंगदारी न देने का कारण बताया जा रहा है। दुकानदार रंजीत कुमार की तहरीर पर मुंगराव गांव के शशांक, लल्ला व राम अचल के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई है।
हंडिया कस्बे में रंजीत केसरवानी की ओम साई कृपा नाम से मोबाइल की दुकान है। उसका आरोप है कि शनिवार की शाम शशांक, लल्ला उसकी दुकान पर आए थे और रंगदारी मांग रहे थे। इससे मना करने पर वे उसे धमकी देते हुए चले गए। रविवार शाम एक बार फिर शशांक अपने दो साथियों के साथ आया और जान से मारने के लिए बमबाजी की। बम फटते ही बगल की मेडिकल स्टोर पर मौजूद फार्मासिस्ट धर्मेन्द्र घायल हो गया। उसके पैर में गंभीर चोट लगी। घटना की जानकारी मिलते ही एसपी गंगापार, सीओ समेत कई थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। घायल फार्मासिस्ट को पुलिस ने अस्पताल भेजा और घटना की छानबीन की।
पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं दुकानदार रंजीत का आरोप है कि धमकी मिलने के बाद उसने पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने के कारण दुकान पर बम से हमला किया गया है।

वाे मरता रहा अफसर तालियां पीटते रहे

स्थान ग्रीनपार्क स्टेडियम का गेट नंबर-10, समय-सुबह 8:45 बजे, जिला प्रशासन की मतदाता जागरूकता रैली के लिए जिले के कई विभागों के आला अफसर स्टेडियम के अंदर मौजूद थे, सैकड़ों लोग भी थे, मातहतों की फौज, नीली बत्ती लगी गाड़ियों की कतारें भी थीं, जिला अस्पताल उर्सला सिर्फ एक किलोमीटर दूर लेकिन खून से लथपथ एक घायल 36 मिनट तक गेट नंबर-10 पर तड़पता रहा। कोई उसे अस्पताल ले जाने वाला नहीं था। अंदर कई अफसर तालियां पीट रहे थे ताे बाहर एडीएम सिटी जैसे आला अफसर फोन पर फोन करते रहे लेकिन 108 एंबुलेंस का फोन ही नहीं उठा। सिपाही दौड़ाए, गनर से फोन कराया, थाने फोन घनघनाया तब जाकर 9.21 बजे मौके पर एंबुलेंस आई, तब तक घायल का काफी खून बह चुका था। एंबुलेंस में रखकर एक किलोमीटर दूर उर्सला ले गए लेकिन वहां डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया, बला टालने के लिए करीब 6 किलोमीटर दूर हैलट रेफर कर दिया। हैलट में मृत घोषित कर दिया गया। गरीब था बेमौत मर गया। इसी के साथ स्मार्ट सिटी, मेट्रो सिटी आदि-आदि का ख्वाब देख रहे शहर में सड़ चुकी सरकारी व्यवस्थाओं की भी मौत हो गई।

सिलेंडर फटा, बुजुर्ग की मौत
फजलगंज के प्रकाश विद्या मंदिर हाता निवासी शिवलखन (60) के परिवार में पत्नी कमला देवी, पांच बेटियां बुद्धशीला, लक्ष्मी, किरण, चांदनी, रोशनी और बेटा बुद्ध सागर हैं। बुद्धशीला के अलावा सभी अविवाहित हैं। शिवलखन गुमटी नंबर पांच स्थित गुरु गोविंद सिंह चौक के पास गुब्बारे बेचकर परिवार का पेट पालता था। बेटे ने बताया कि पिता को ग्रीनपार्क स्टेडियम में आयोजित मतदाता जागरूकता रैली के लिए गैस के गुब्बारे लगाने का आर्डर मिला था। पिता, मां और छोटी बहन चांदनी (14) हीलियम गैस सिलेंडर और गुब्बारे लेकर ग्रीनपार्क गए थे। गेट नंबर-10 के पास खड़े होकर पिता गुब्बारों में गैस भर रहे थे। मां गुब्बारों के गुच्छे बना रही थी। चांदनी गुब्बारों को ग्रीनपार्क में रेलिंग में बांध रही थी। सुबह करीब 8:45 बजे सिलेंडर अचानक फट गया। इसकी चपेट में आकर माता-पिता घायल हो गए। शिवलखन के पेट में गंभीर जख्म हुए, मां उछल कर दूर जा गिरी। काफी देर तक दोनों को होश नहीं रहा। बाद में घायल शिवलखन सड़क पर पड़ा तड़पता रहा। जान बचाने के लिए गुहार लगाता रहा।

फोन पर फोन, कोई आगे नहीं आया
माता-पिता की हालत देखकर गुब्बारे लगा रही बेटी बदहवास हो गई। कभी मां को संभालती, कभी पिता के पास जाकर रोती। 8.51 बजे एटीएम सिटी केपी सिंह मौके पर आ गए, तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन मिलाया, फोन उठा ही नहीं। भीड़ जुटने लगी, 8.56 बजे गनर से फोन करने को कहा, फिर कोतवाली फोन मिलाया, तब तक घायल का काफी खून बह चुका था। कई गाड़ियां आस-पास खड़ी थीं लेकिन किसी ने घायल को अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई।

बेटी बदहवास, कोई नहीं पास
माता-पिता की हालत देखकर बेटी बदहवास हो गई थी, 9.01 बजे मां को संभालने में लगी। 9.10 बजे कुछ वालेंटियर आए और मां को गोद में उठाकर अस्पताल ले जाने लगे। एंबुलेंस अभी भी नहीं आई। 9.12 बजे बेटी भागकर पिता के पास पहुंची, पिता ने पानी मांगा तो उनके मुंह में पानी डाला। तब तक न कोई अफसर उसके पास पहुंचा और न ही अपनी गाड़ी से अस्पताल भेजा। 9.14 बजे किसी ने सफेद चादर लाकर सड़क पर पड़े पिता पर डाल दी। 9.19 पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी आई।

उर्सला से हैलट टरकाया
सबसे बाद में 9.21 बजे एंबुलेंस आई फिर शिवलखन को एक किलोमीटर दूर उर्सला ले गए लेकिन वहां इलाज नहीं किया गया, कहा हैलट बड़ा सेंटर है, वहां ले जाओ। उर्सला से हैलट करीब 6 किलोमीटर दूर है। रास्ते में करीब आधा घंटा और लग गया। हैलट में डॉक्टर साहब तक पहुंचने, डॉक्टर साहब के चेक करने तक बहुत देर हो चुकी थी, शिवलखन मर चुका था।

अधिक खून बहने से मौत
पुलिस ने शिवलखन के शव को पोस्टमार्टम हाउस और मां को उर्सला भिजवाया। पोस्टमार्टम में शिव लखन के दाहिनी जांघ, पेट के दाहिनी तरफ नीचे, दाहिने हाथ के कंधे के नीचे और कोहनी एवं कलाई के बीच चोट मिली है। अधिक खून बहने से मौत की पुष्टि हुई है।

फजलगंज में परिजनों का हंगामा
हादसे का शिकार शिवलखन के परिजनों ने मुआवजे के लिए पोस्टमार्टम हाउस और फजलगंज में हंगामा किया। पुलिस मौके पर पहुंची और मदद दिलाने का भरोसा देकर लोगों को शांत कराया।

परिवार के सामने दो जून की रोटी की दिक्कत
शिवलखन की मौत से परिवार के सामने रोटी की संकट पैदा हो गया है। शिवलखन की कमाई से ही परिवार का पेट पलता था। बेटे बुद्ध सागर ने कहा कि रोटी के लाले हैं, मां का इलाज कैसे कराएंगे। समझ नहीं आ रहा।

घायल महिला को यूपी डॉयल-100 की गाड़ी से अस्पताल भेजा था। घायल पति की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे पुलिस गाड़ी से अस्पताल ले जाया जा सके। इसलिए एंबुलेंस का इंतजार किया गया।
राजेंद्रधर द्विवेदी, सीओ, कोतवाली

36 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंचने की बात गलत है। ग्रीनपार्क से 108 एंबुलेंस को सुबह 8:49 बजे कॉल की गई। 8:55 बजे एसीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव की कॉल भी आई। उर्सला से 9:01 बजे एंबुलेंस भेजी गई थी, पर तब तक गुब्बारे वाले की मृत्यु हो गई थी। उसे तुरंत उर्सला फिर हैलट ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया।
अजय यादव, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, 108 एंबुलेंस

मुलायम की छोटी बहू ने खोला झगड़े के वक्त घर के एक अहम दरवाजे का राज

मुलायम स‌िंह की छोटी बहू अपर्णा यादव लखनऊ कैंट से सपा की प्रत्याशी हैं। मुलायम स‌िंह यादव उनके ल‌िए 14 फरवरी से वोट मांगेंगे। बता दें क‌ि अपर्णा के टिकट को लेकर भी यादव परिवार में खींचतान की खबरें आई थीं और अपर्णा को भी झगड़े की एक वजह कहा जा रहा था। हालांक‌ि परिवार में हुए इस कलह पर अपर्णा का कुछ और ही कहना है।

अपर्णा यादव मुलायम स‌िंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। वह अपने बेबाक बयानों के ल‌िए अक्सर चर्चा में रहती हैं। यहां तक क‌ि उन्होंने खुद ये बात मानी, मेरे मन में जो आता है वह बोल देती हूं। एक इंटरव्यू के दौरान उनसे जब पूछा गया क‌ि ऐसा माना जा रहा है कि यादव परिवार में आपको टिकट देने को लेकर भी खींचतान हुई। इस पर उन्होंने जवाब दिया, कांग्रेस से गठबंधन के चलते कैंट सीट पर विचार चल रहा था। ये बात इतनी बड़ी नहीं ‌थी जितना इसे पेश किया गया। अपर्णा ने कहा, अखिलेश भइया ने हमेशा बड़े बेटे का फर्ज निभाया है और मुझे उम्मीद है कि वह मेरे लिए वोट भी मांगेंगे।

अपर्णा ने कहा क‌ि लोग बेवजह मुझे झगड़े की जड़ बताते हैं जबक‌ि मैंने तो परिवार को हमेशा जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा क‌ि ये सच्चाई कभी नहीं बदलेगी क‌ि वो हमारे बड़े हैं और वो जो कहेंगे हमें मानना होगा। उन्होंने बताया, मैंने तो पर‌िवार के ल‌िए फेव‌िकोल का और म‌िठास घोलने का काम क‌िया है।

अपर्णा ने ये भी कहा, बड़ों में कभी-कभी अहम आ जाता है पर हमने बच्चों के बीच कभी दूरी नहीं आने दी। अपर्णा ने बताया क‌ि हमारे घर के पीछे का एक कॉमन दरवाजा है जिसे हमने कभी बंद नहीं होने दिया।

अपर्णा ने बताया, मैंने हमेशा पर‌िवार के बीच कड़ी बनने का काम क‌िया है। मैं चाहती हूं क‌ि मेरी बच्ची को एक ऐसा पर‌िवार म‌िले ज‌िसमें दादा, दादी, ताऊ, ताई सभी हों।

भाभी डिम्पल के बारे में अपर्णा ने कहा क‌ि उनसे भी बहुत अच्छे रिश्ते हैं। मेट्रो ट्रायल रन के दौरान भी मुझे भइया-भाभी ने काफी तवज्जो दी थी जिससे मुझे काफी खुशी हुई थी।

पत‌ि प्रतीक यादव के राजनीति में आने के सवाल पर अपर्णा ने कहा, वह अपने बिजनेस में काफी खुश हैं। अपर्णा ने बताया क‌ि प्रतीक को लगता था क‌ि अपर्णा को राजनीति में आना चाहिए और मुलायम स‌िंह ने उन्हें राजनीति में आने के लिए ‌प्रेरित किया।