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सुप्रीम कोर्ट पहुंचे रेप के आरोपी मंत्री गायत्री प्रजापति, गिरफ्तारी पर रोक की लगाई गुहार

रेप के आरोपी सपा नेता व यूपी सरकार में मंत्री गायत्री प्रजापति अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार, गायत्री प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई है। उनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।
लखनऊ : रेप के आरोपी सपा नेता व यूपी सरकार में मंत्री गायत्री प्रजापति अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार, गायत्री प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई है। उनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

प्रजापति का कहना है कि अदालत ने उनका पक्ष जाने बिना आदेश पारित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दायर याचिका में प्रजापति ने कहा कि बिना उन्हें नोटिस भेजे बिना और बिना उनका पक्ष जाने फैसला ले लिया गया। इसलिय उक्‍त को आदेश वापस लिया जाए। साथ ही उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग भी की है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक महिला के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार और उसकी बेटी के साथ बलात्कार की कोशिश के आरोप में बीते दिनों सरकार के वरिष्ठ मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में प्रजापति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

प्रजापति और उनके छह साथियों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम सहित बलात्कार एवं बलात्कार की कोशिश संबंधी विभिन्न धाराओं में गौतमपल्ली पुलिस थाने पर मुकदमा दर्ज किया गया। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया था कि वह इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करके आठ सप्ताह के भीतर मामले की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे।

गौर हो कि गायत्री पर 35 वर्षीय एक महिला का आरोप है कि जब वह उनसे तीन वर्ष 2014 में पहले मिली थी तो उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया। गायत्री ने पीडि़ता के कुछ आपत्तिजनक फोटो भी लिये और धमकी दी कि वह इन फोटो को सार्वजनिक कर देंगे। इस धमकी के दम पर वह दो साल तक बलात्कार करते रहे।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश ने प्रजापति को मंत्री परिषद से बर्खास्‍त कर दिया था। मगर मुलायम सिंह यादव के दखल के बाद उन्हें पुन: मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया और वे अमेठी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।

यूपीआरटीओयू से केशरीनाथ त्रिपाठी को एलएलडी की उपाधि

इलाहाबाद। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी को रविवार को यहां डॉक्टर ऑफ लॉज (एलएलडी) की मानद उपाधि दी गई। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (यूपीआरटीओयू) के 11वें दीक्षांत समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया। वह मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता कर रहे प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा कमाई के साथ अध्ययन का बेहतरीन साधन है। आयोजन में कुल 13022 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। कुछ को स्वर्ण पदक भी दिए गए।

राज्यपाल व कुलाधिपति राम नाईक ने अपने संबोधन पर इस बात पर प्रसन्नता जताई कि साक्षरता दर में बालिकाएं आगे हैं। उन्होंने छात्रों को सफलता के सूत्र भी दिए। कहा खुश रहना, दूसरों की तारीफ और अहंकार मुक्त रहने वाला जीवन में कभी असफल नहीं होता। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा मात्र सीखने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उद्देश्य संस्कृति और संस्कार आगे बढ़ाना हो। युवाशक्ति को उनकी इच्छा के अनुसार कॅरियर चुनने का मौका मिलना चाहिए। ई-गर्वनेंस से ज्ञान में बढ़ोतरी की बात कहते हुए उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में उच्च स्तरीय अध्ययन होने चाहिए। कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने संस्थान के विस्तार की जानकारी दी।

पदक पाकर फूले नहीं समाए

मुक्त विवि में विभिन्न विद्या शाखाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल के हाथों उपाधि पाने वालों में 10 छात्राएं और छह छात्र थे। चार को दोहरा पदक मिला। दीप्ति श्रीवास्तव, (लखनऊ) शिवांगी पुरवार, आराधना तिवारी, निधिरानी चौबे (वाराणसी), अर्शी फातिमा (सीतापुर), ममता पाल, वंदना कुमारी, शमामा परवीन और सुनीता पांडेय और छात्रों में विजय कुमार (आजमगढ़), प्रशांत कुमार सिंह (सोनभद्र), मन्ना लाल प्रसाद, आशीष कुमार राय, मनोज कुमार शुक्ल और अमरनाथ राज्यपाल के हाथों उपाधि पाकर फूले नहीं समाए। ज्ञानपुर की दिव्यांग छात्रा सुनीता पाण्डेय की उपाधि उसके पिता जयराम पाण्डेय ने ली।

बनी सहमति, छात्रों का अनशन खत्म

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति के खिलाफ चल रहा छात्रों का अनशन बृहस्पतिवार को खत्म हो गया। इविवि प्रशासन और छात्रों की ओर से एक-दूसरे पर की गई एफआईआर वापस लेने की लिखित सहमति बनी। इविवि प्रशासन ने छात्रों को आश्वस्त किया कि आंदोलन के दौरान उनकी ओर से उठाई गई सभी मांगें पूरी कर दी गईं हैं और इस दौरान आंदोलित छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अनशनकारी छात्रों से बृहस्पतिवार को इविवि प्रशासन की ओर से प्रॉक्टर प्रो. हर्ष कुमार, डीएसडब्ल्यू प्रो. आरकेपी सिंह, ऑटा अध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे, प्रो. आरके चौबे ने वार्ता की। इस दौरान प्रशासन की ओर से एसपी सिटी विपिन टाडा, एसीएम आशीष मिश्र भी मौजूद रहे। अधिकारियाें ने अनशनकारी छात्रों अदील हमजा, नीरज प्रताप सिंह, अनुभव उपाध्याय, अनुभव सिंह, आशुतोष पाठक, जितेंद्र कुमार बिंद, अनुज शुक्ल को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया।

छात्रों की मांग पर कुलपति ने पूर्व गठित प्रवेश समिति को भंग करने के साथ स्थाई कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया। छात्रों को बताया गया कि 15 अप्रैल के भीतर नियुक्ति पूरी कर ली जाएगी। प्रवेश परीक्षा में ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन का भी विकल्प होगा। पुस्तकालय से छात्रों को 20 मार्च से किताबें जारी की जाएंगी।

इस आशय का लिखित आश्वासन छात्रों को रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ल ने दिया। अनशन खत्म होने के बाद अध्यक्ष रोहित मिश्र एवं उपाध्यक्ष अदील हमजा ने कहा कि छात्र हितों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। कहा कि छात्रों ने अपनी एकजुटता के बल पर विवि प्रशासन से अपनी मांगें मनवाईं। छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने कहा कि उनकी ओर से विवि पर की गई एफआईआर वापस ली जाएगी। विवि भी छात्रों पर लगाए आरोप वापस लेगा और किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

इस महिला ने डॉन अतीक को किया था नाकों चने चबाने पर मजबूर

जरायम की दुनिया से सूबे की सियासत में पैठ बनाने वाले बाहुबलियों का लंबी फेहरिस्त है। इलाहाबाद और आसपास के इलाकों में दबदबा रखने वाला अतीक अहमद उनमें से एक है। वह शायद इकलौता सांसद है जिसे भगोड़ा घोषित किया गया था।

पांच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके अतीक का दबदबा और रुतबा तब घटने लगा जब एक महिला से चुनाव हार गए थे । 2005 में बसपा के तत्कालीन विधायक राजू पाल की हत्या हुई तो अतीक मुख्य आरोपी बनाया गया।

जानकारी के मुताबिक पूजा पाल एक अस्पताल में सफाई का काम करती थीं। अस्पताल में ही उनकी राजू पाल से पहली मुलाकात हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और राजू पाल ने उनसे 2005 में शादी की। विधायक चुने जाने के चार महीने बाद ही राजू पाल की दिन दहाड़े हत्या हो गई। पूजा से उनकी शादी को सिर्फ नौ महीने बीते थे।

17 साल की उम्र में ही दर्ज हो गया था पहला मुकदमा


अतीक अहमद (फाइल फोटो)
सत्ता बदली तो राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने उसको नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया। हालत यह हो गई कि अतीक को इलाहाबाद छोड़ कर भागना पड़ा और नए सियासी ठिकाने की तलाश करनी पड़ी।

बालिग होने से पहले ही महज 17 साल में अतीक पर पहला मुकदमा हुआ, वो भी हत्या का। इसके बाद अतीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक समय ऐसा भी आया जब अतीक पर उसकी उम्र से ज्यादा मुकदमे थे।

1990 और 2000 के दशक में अतीक ने सरकारी ठेके हासिल करने, जबरन वसूली के लिए अपहरण और हत्या की घटनाओं को अंजाम देकर दहशत कायम कर दी। देखते ही देखते इलाहाबाद और आसपास के जिलों में अतीक का खौफ कायम हो चुका था।

गेस्ट हाउस कांड में भी था अतीक का नाम


अतीक अहमद (फाइल फोटो)
1992 में इलाहाबाद पुलिस ने पहली बार अतीक अहमद का कच्चा चिट्ठा जारी किया, जिसमें बताया गया था कि अतीक अहमद के खिलाफ लखनऊ, कौशांबी, चित्रकूट, इलाहाबाद के साथ-साथ बिहार में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली मामले दर्ज हैं।

सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद में दर्ज हुए। अतीक पर जिस रफ्तार से मुकदमे कायम हो रहे थे, उसी रफ्तार से जरायम की दुनिया में उसका कद बढ़ रहा था। कई ऐसे मौके आए जब अतीक को सत्ता की ताकत का एहसास हो चुका था।

1989 में अतीक ने सियासत का रुख किया और यहां भी धमाकेदार इंट्री की। निर्दल प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस उम्मीदवार को मात देकर सीधे विधानसभा जा पहुंचा। 1991 और 1993 में भी अतीक निर्दल चुनाव लड़ा और विधायक बना।

1993 में विधान सभा चुनाव में सपा-बसपा की सरकार बनी तो अतीक भी मुलायम के साथ आ गया। 2 जून 1995 को मायावती के साथ हुए गेस्ट हाउस कांड में भी अतीक का नाम आया था।

मुलायम सरकार में मस्त और मायावती सरकार में पस्त रहा अतीक


मीड‌िया से मुखात‌िब अतीक
1996 में समाजवादी पार्टी ने अतीक को टिकट दे दिया और वह लगातार चौथी बार विधायक बन गया। सपा का साथ ज्यादा दिन का नहीं रहा। 1999 में अतीक ने सोने लाल पटेल का साथ पकड़ लिया और अपना दल के टिकट पर संसद जाने का ख्वाब देखने लगा।

चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा लेकिन 2002 में अपना दल के टिकट पर चुनाव जीतकर लगातार पांचवी बार विधायक बना। 2003 में जब यूपी में सपा सरकार बनी तो अतीक ने फिर से मुलायम सिंह का हाथ पकड़ लिया। 2004 में अतीक का लोकसभा पहुंचने का ख्वाब भी पूरा हो गया।

वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर फूलपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा पहुंच गया। खाली हुई विधानसभा सीट पर अतीक के भाई अशरफ चुनाव मैदान में उतरा लेकिन उसे बसपा के राजू पाल ने हरा दिया।

विधायक बनने के कुछ ही दिनों बाद विधायक राजू पाल को 25 जनवरी 2005 को इलाहाबाद में दिनदहाड़े गोली से छलनी कर दिया गया। आरोप अतीक और उनके भाई अशरफ पर लगा।

समय बदला और सूबे में सरकार बदली तो अतीक के हौसले पस्त होने लगे। मायावती के जेहन में गेस्ट हाउस कांड के जख्म हरे थे। अतीक के सारे मामले खुलने लगे और एक के बाद एक इलाहाबाद में कई मुकदमे दर्ज हो गए। इस दौरान अतीक वह भूमिगत हो गया। पार्टी की बदनामी होने लगी तो मुलायम ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

वांटेड एमपी बन गया था माफ‌िया अतीक


अतीक अहमद समर्थकों के साथ
गिरफ्तारी के डर से सांसद अतीक फरार था। उसके घर, कार्यालय सहित पांच स्थानों की संपत्ति न्यायालय के आदेश पर कुर्क की जा चुकी थी। 2007 के आखिर तक अतीक अहमद की गिरफ्तारी पर पुलिस ने बीस हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया और पूरे देश में अलर्ट जारी किया गया था।

अतीक अहमद ने दिल्ली पुलिस के सामने आत्म समर्पण कर दिया और मायावती से अपनी जान को खतरा बताया। अतीक के बुरे दिन शुरू हो चुके थे। पुलिस और विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने अतीक अहमद की एक खास परियोजना अलीना सिटी को अवैध घोषित करते हुए उसका निर्माण ध्वस्त कर दिया था।

ऑपरेशन अतीक के तहत ही 5 जुलाई, 2007 को राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल ने अतीक के खिलाफ धूमनगंज थाने में अपहरण और जबरन बयान दिलाने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद चार अन्य गवाहों की ओर से भी उनके खिलाफ मामले दर्ज कराए गए थे।

दो माह के भीतर ही अतीक अहमद के खिलाफ इलाहाबाद में 9, कौशांबी और चित्रकूट में एक-एक मुकदमा दर्ज किया गया था। 2012 में सपा की सरकार बनी तो अतीक के दिन फिर बहुरने लगे।

कुछ ही दिन में जमानत मिल गई और वह बाहर आकर सपा में शामिल हो गए । 2014 में सपा ने उनके गृह जनपद श्रावस्ती से टिकट दिया जिसमें वह बुरी तरह से हार गए।
पूजा पाल की वजह से छोड़ना पड़ गया था इलाहाबाद


पूजा पाल की शादी की फाइल फोटो
इलाहाबाद में अतीक की तूती बोलती थी। लेकिन राजू पाल की हत्या के बाद जब बसपा सरकार आई तो पूजा पाल दोबारा विधायक बनीं। पूजा पाल ने अतीक की नाक में इतना दम किया कि जिस सीट पर पांच बार विधायक रह चुका था, उस सीट को ही नहीं इलाहाबाद जिले को भी छोड़कर भागना पड़ा।

2014 के चुनाव में अतीक को अपने गृह जनपद श्रावस्ती जाकर चुनाव लड़ना पड़ा। 2017 में अतीक एक बार फिर विधायक बनने के लिए अतीक सक्रिय हुआ। सपा में झगड़े से पहले शिवपाल यादव की लिस्ट में उसे कानपुर की कैंट सीट से प्रत्याशी बनाया।

अखिलेश ने उसका टिकट काट दिया। इसी दौरान इलाहाबाद में शियाट्स में मारपीट के मामले में फिर उसका नाम सुर्खियों में आया। मामला अदालत में पहुंचा। कोर्ट के सख्त रुख के कारण उसे सरेंडर करना पड़ा।

हत्या, अपहण, गुंडा एक्ट के मुकदमें दर्ज हैं अतीक पर


फा‌इल फोटो
सपा में झगड़े से पहले शिवपाल यादव की लिस्ट में उसे कानपुर की कैंट सीट से प्रत्याशी बनाया। अखिलेश ने उसका टिकट काट दिया। इसी दौरान इलाहाबाद में शियाट्स में मारपीट के मामले में फिर उसका नाम सुर्खियों में आया। मामला अदालत में पहुंचा। कोर्ट के सख्त रुख के कारण उसे सरेंडर करना पड़ा।

अतीक अहमद पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, शांति व्यवस्था भंग करने, थानाध्यक्ष के साथ मारपीट करने, लाइसेंसी शस्त्र के दुरुपयोग, गुंडा एक्ट, होटल मालिक के साथ मारपीट, शस्त्र निरस्तीकरण के बाद भी जमा न करने, जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप में गंभीर धाराओं में मुकदमे कायम हुए हैं।

वीसी के खिलाफ अनशन जारी, समर्थन में भी अभियान

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। रजिस्ट्रार तथा सुरक्षा सलाहकार को हटाने की मांग को लेकर अब भी गतिरोध बना हुआ है। छात्रसंघ के बैनर तले सात छात्रों का बेमियादी अनशन तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। अध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर रामसेवक दुबे तथा अन्य शिक्षकों ने आंदोलनकारी छात्रों से वार्ता की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अफसरों की नियुक्ति, लाइब्रेरी से किताबें निर्गत करने की तारीख भी तय कर दी, लेकिन छात्र पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ कुलपति के समर्थन में भी छात्रों का अभियान जारी रहा।
प्रोफेसर दुबे के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को फिर मांग माने जाने का लिखित आश्वासन दिया। रजिस्ट्रार ने लिखकर दिया कि 15 अप्रैल तक कुलसचिव, वित्त अधिकारी और परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति कर ली जाएगी। उन्होंने यह भी लिखकर दिया कि 20 मार्च से लाइब्रेरी से किताबें निर्गत की जाएंगी। प्रोफेसर दुबे के साथ चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार तथा अन्य शिक्षक भी छात्रों से वार्ता के लिए छात्रसंघ भवन पर पहुंचे थे।

चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार ने भी आश्वासन दिया कि आत्मदाह करने वाले जाबिर रजा पर से मुकदमा वापस लिया जाएगा। इसके बाद भी अनशनकारी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। वे प्रोफेसर एनके शुक्ला को रजिस्ट्रार के पद से हटाकर किसी संयुक्त कुलसचिव को चार्ज देने तथा छात्र एवं सुरक्षा सलाहकार प्रोफेसर माता अंबर तिवारी को हटाए जाने की मांग पर अड़े थे। छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा का कहना था कि अन्य मांगों पर उनकी सहमति बन गई है। इन दोनों मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन सहमत हो जाए तो अनशन खत्म कर दिया जाएगा।

छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा का कहना था कि जब तक रजिस्ट्रार और सुरक्षा सलाहकार को हटा नहीं दिया जाता उनका आंदोलन जारी रहेगा। अदील के अलावा अनशन करने वाले अन्य छात्र नीरज प्रताप सिंह, अनुभव उपाध्याय, अनुभव सिंह, आशुतोष पाठक, जितेंद्र कुमार बिंद और अनुज शुक्ल हैं। अनशन के समर्थन में भीम सिंह चंदेल, जिया कौनेन रिजवी, विश्वदीपक, विवेकानंद पाठक, अखिलेश गुप्ता, विक्रांत सिंह, अभिषेक तिवारी, सीएमपी छात्रसंघ के अध्यक्ष विशाल सिंह, हरिनाम सिंह आदि ने आंदोलन का समर्थन किया।

दिल्ली से लौटे ब्रजेश सक्सेना, संजय पांडेय, पवन यादव ने बताया कि मोहम्मद जाबिर रजा की तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। छात्र युवा संघर्ष समिति के सूरज सिंह, अंजनी कुमार मिश्र आदि ने छात्रसंघ के आंदोलन का भी समर्थन किया।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के समर्थन में बुधवार को भी छात्रों ने परिसर में जुलूस निकाला। एयू स्टूडेंट फोरम के बैनर तले उन्होंने कुलपति के समर्थन में जनसंपर्क अभियान भी चलाया। यूपी रिसर्च एसोसिएशन की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री से मिलकर कुलपति की उपलब्धियों को उनके सामने रखे जाने की घोषणा की गई।
फोरम के बैनर तले छात्र परिसर में जुलूस निकालते हुए कुलपति दफ्तर पर पहुंचे। वे ‘सेव विश्वविद्यालय सेव वीसी’ का नारा लगाते हुए चल रहे थे। छात्रों ने छात्रसंघ को बंद करने की भी मांग उठाई। छात्रों का कहना था कि कुलपति को मंत्रालय की जांच में भी क्लीन चिट दे दी गई है।

इस खुशी में उन्होंने गुलाल-अबीर भी उड़ाए। जुलूस में सर्वेश सिंह, नीरज सिंह, कमल किशोर उपाध्याय, निखलेश मिश्रा आदि शामिल रहे। यूपी रिसर्च एसोसिएशन की बैठक में भी कुलपति के फैसलों का समर्थन किया गया। सदस्यों ने छात्रसंघ के बैनर तले जारी आंदोलन के औचित्य पर सवाल उठाया। बैठक में निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मानव संसाधन विकास मंत्री से मिलेगा और कुलपति की उपलब्धियों से उन्हें अवगत कराएगा। बैठक में डॉ.वशिष्ठ नारायण शुक्ल, राजेश शुक्ल, आरपी मिश्र, डॉ.विनोद शुक्ला, डॉ.वीसी चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।

अखिल भारतीय स्तर पर होने वाले सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन इंट्रेस टेस्ट में शामिल होने के इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि इससे विश्वविद्यालय में पठन-पाठन का माहौल बिगड़ेगा। उनका यह भी कहना था कि कॉमन इंट्रेस टेस्ट से देश के सभी बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान बाहर हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉमन इंट्रेस टेस्ट में शामिल होने का प्रस्ताव मंगलवार को परीक्षा कराने वाली संस्था राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय को भेज दिया है।

दूसरी शादी कर रहा था युवक, क्या हुआ जब सामने आ गई पहली पत्नी

लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में रविवार रात पत्नी को तलाक दिए बिना ही दूसरा ब्याह रचाने जा रहे दूल्हे को लेने के देने पड़ गए। पहली पत्नी को भनक लगी तो उसने गेस्ट हाउस पहुंचकर हंगामा किया।
पुलिस को आता देख दूल्हा स्टेज से कूदकर भाग निकला। इस बीच बाराती भी वहां से खिसक लिए। पुलिस ने शादी रुकवा दी। वधू पक्ष ने युवक पर धोखाधड़ी करके दूसरा ब्याह रचाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।

पुलिस के मुताबिक, आलमबाग विशेश्वर नगर निवासी अभिषेक तिवारी ने 2014 में कानपुर की रहने वाली युवती से हिंदू रीति रिवाज से शादी की थी। महिला का आरोप है कि शादी के बाद ससुराल आने पर सास ने उसके जेवर अपने पास रख लिए।

इसके बाद दहेज में आठ लाख रुपये न लाने पर उसकी बेरहमी से पिटाई करके खदेड़ दिया। किसी तरह महिला कानपुर पहुंची और घरवालों को आपबीती बताई। महिला ने पति समेत ससुरालीजनों पर दहेज प्रताड़ना व मारपीट समेत गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवाद कोर्ट में विचाराधीन था।

इस बीच अभिषेक तिवारी के घरवालों ने पीजीआई इलाके की रहने वाली युवती से दूसरा ब्याह तय कर दिया। शनिवार को युवक की दूसरी शादी की तैयारियां चल रही थी। वृंदावन के गेस्ट हाउस में बारात पहुंच गई। इसकी जानकारी पहली पत्नी को लगी तो वह मामले की शिकायत लेकर थाने पहुंची।

महिला एसएसआई बलवंत शाही फोर्स संग गेस्ट हाउस पहुंचे तो वहां अफरातफरी मच गई। पहली पत्नी को देखकर दूल्हा स्टेज से कूदकर भाग निकला। वहीं, बाराती भी धीरे-धीरे वहां से भाग निकले।

पुलिस ने दूल्हे के भाई को हिरासत में लेकर थाने आई है। लड़की वालों ने युवक पर धोखे से दूसरा ब्याह रचाने का आरोप लगाते थाने में तहरीर दी है। इंस्पेक्टर जैनुद्दीन अंसारी ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।

मोबाइल दुकान पर बमबाजी, फार्मासिस्ट जख्मी

इलाहाबाद : टैक्सी स्टैंड के करीब स्थित मोबाइल फोन की एक दुकान पर रविवार शाम ताबड़तोड़ बमबाजी होने से दहशत फैल गई। इससे दूसरी दुकान पर मौजूद फार्मासिस्ट धर्मेन्द्र सिंह जख्मी हो गया। घटना स्थल से थोड़ी दूर पर भाजपा-अपना दल गठबंधन प्रत्याशी प्रमिला त्रिपाठी का चुनाव कार्यालय था। कुछ लोगों ने कार्यालय पर हमले का हल्ला मचा दिया तो खलबली मच गई। घटना के पीछे रंगदारी न देने का कारण बताया जा रहा है। दुकानदार रंजीत कुमार की तहरीर पर मुंगराव गांव के शशांक, लल्ला व राम अचल के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई है।
हंडिया कस्बे में रंजीत केसरवानी की ओम साई कृपा नाम से मोबाइल की दुकान है। उसका आरोप है कि शनिवार की शाम शशांक, लल्ला उसकी दुकान पर आए थे और रंगदारी मांग रहे थे। इससे मना करने पर वे उसे धमकी देते हुए चले गए। रविवार शाम एक बार फिर शशांक अपने दो साथियों के साथ आया और जान से मारने के लिए बमबाजी की। बम फटते ही बगल की मेडिकल स्टोर पर मौजूद फार्मासिस्ट धर्मेन्द्र घायल हो गया। उसके पैर में गंभीर चोट लगी। घटना की जानकारी मिलते ही एसपी गंगापार, सीओ समेत कई थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। घायल फार्मासिस्ट को पुलिस ने अस्पताल भेजा और घटना की छानबीन की।
पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं दुकानदार रंजीत का आरोप है कि धमकी मिलने के बाद उसने पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने के कारण दुकान पर बम से हमला किया गया है।

वाे मरता रहा अफसर तालियां पीटते रहे

स्थान ग्रीनपार्क स्टेडियम का गेट नंबर-10, समय-सुबह 8:45 बजे, जिला प्रशासन की मतदाता जागरूकता रैली के लिए जिले के कई विभागों के आला अफसर स्टेडियम के अंदर मौजूद थे, सैकड़ों लोग भी थे, मातहतों की फौज, नीली बत्ती लगी गाड़ियों की कतारें भी थीं, जिला अस्पताल उर्सला सिर्फ एक किलोमीटर दूर लेकिन खून से लथपथ एक घायल 36 मिनट तक गेट नंबर-10 पर तड़पता रहा। कोई उसे अस्पताल ले जाने वाला नहीं था। अंदर कई अफसर तालियां पीट रहे थे ताे बाहर एडीएम सिटी जैसे आला अफसर फोन पर फोन करते रहे लेकिन 108 एंबुलेंस का फोन ही नहीं उठा। सिपाही दौड़ाए, गनर से फोन कराया, थाने फोन घनघनाया तब जाकर 9.21 बजे मौके पर एंबुलेंस आई, तब तक घायल का काफी खून बह चुका था। एंबुलेंस में रखकर एक किलोमीटर दूर उर्सला ले गए लेकिन वहां डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया, बला टालने के लिए करीब 6 किलोमीटर दूर हैलट रेफर कर दिया। हैलट में मृत घोषित कर दिया गया। गरीब था बेमौत मर गया। इसी के साथ स्मार्ट सिटी, मेट्रो सिटी आदि-आदि का ख्वाब देख रहे शहर में सड़ चुकी सरकारी व्यवस्थाओं की भी मौत हो गई।

सिलेंडर फटा, बुजुर्ग की मौत
फजलगंज के प्रकाश विद्या मंदिर हाता निवासी शिवलखन (60) के परिवार में पत्नी कमला देवी, पांच बेटियां बुद्धशीला, लक्ष्मी, किरण, चांदनी, रोशनी और बेटा बुद्ध सागर हैं। बुद्धशीला के अलावा सभी अविवाहित हैं। शिवलखन गुमटी नंबर पांच स्थित गुरु गोविंद सिंह चौक के पास गुब्बारे बेचकर परिवार का पेट पालता था। बेटे ने बताया कि पिता को ग्रीनपार्क स्टेडियम में आयोजित मतदाता जागरूकता रैली के लिए गैस के गुब्बारे लगाने का आर्डर मिला था। पिता, मां और छोटी बहन चांदनी (14) हीलियम गैस सिलेंडर और गुब्बारे लेकर ग्रीनपार्क गए थे। गेट नंबर-10 के पास खड़े होकर पिता गुब्बारों में गैस भर रहे थे। मां गुब्बारों के गुच्छे बना रही थी। चांदनी गुब्बारों को ग्रीनपार्क में रेलिंग में बांध रही थी। सुबह करीब 8:45 बजे सिलेंडर अचानक फट गया। इसकी चपेट में आकर माता-पिता घायल हो गए। शिवलखन के पेट में गंभीर जख्म हुए, मां उछल कर दूर जा गिरी। काफी देर तक दोनों को होश नहीं रहा। बाद में घायल शिवलखन सड़क पर पड़ा तड़पता रहा। जान बचाने के लिए गुहार लगाता रहा।

फोन पर फोन, कोई आगे नहीं आया
माता-पिता की हालत देखकर गुब्बारे लगा रही बेटी बदहवास हो गई। कभी मां को संभालती, कभी पिता के पास जाकर रोती। 8.51 बजे एटीएम सिटी केपी सिंह मौके पर आ गए, तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन मिलाया, फोन उठा ही नहीं। भीड़ जुटने लगी, 8.56 बजे गनर से फोन करने को कहा, फिर कोतवाली फोन मिलाया, तब तक घायल का काफी खून बह चुका था। कई गाड़ियां आस-पास खड़ी थीं लेकिन किसी ने घायल को अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई।

बेटी बदहवास, कोई नहीं पास
माता-पिता की हालत देखकर बेटी बदहवास हो गई थी, 9.01 बजे मां को संभालने में लगी। 9.10 बजे कुछ वालेंटियर आए और मां को गोद में उठाकर अस्पताल ले जाने लगे। एंबुलेंस अभी भी नहीं आई। 9.12 बजे बेटी भागकर पिता के पास पहुंची, पिता ने पानी मांगा तो उनके मुंह में पानी डाला। तब तक न कोई अफसर उसके पास पहुंचा और न ही अपनी गाड़ी से अस्पताल भेजा। 9.14 बजे किसी ने सफेद चादर लाकर सड़क पर पड़े पिता पर डाल दी। 9.19 पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी आई।

उर्सला से हैलट टरकाया
सबसे बाद में 9.21 बजे एंबुलेंस आई फिर शिवलखन को एक किलोमीटर दूर उर्सला ले गए लेकिन वहां इलाज नहीं किया गया, कहा हैलट बड़ा सेंटर है, वहां ले जाओ। उर्सला से हैलट करीब 6 किलोमीटर दूर है। रास्ते में करीब आधा घंटा और लग गया। हैलट में डॉक्टर साहब तक पहुंचने, डॉक्टर साहब के चेक करने तक बहुत देर हो चुकी थी, शिवलखन मर चुका था।

अधिक खून बहने से मौत
पुलिस ने शिवलखन के शव को पोस्टमार्टम हाउस और मां को उर्सला भिजवाया। पोस्टमार्टम में शिव लखन के दाहिनी जांघ, पेट के दाहिनी तरफ नीचे, दाहिने हाथ के कंधे के नीचे और कोहनी एवं कलाई के बीच चोट मिली है। अधिक खून बहने से मौत की पुष्टि हुई है।

फजलगंज में परिजनों का हंगामा
हादसे का शिकार शिवलखन के परिजनों ने मुआवजे के लिए पोस्टमार्टम हाउस और फजलगंज में हंगामा किया। पुलिस मौके पर पहुंची और मदद दिलाने का भरोसा देकर लोगों को शांत कराया।

परिवार के सामने दो जून की रोटी की दिक्कत
शिवलखन की मौत से परिवार के सामने रोटी की संकट पैदा हो गया है। शिवलखन की कमाई से ही परिवार का पेट पलता था। बेटे बुद्ध सागर ने कहा कि रोटी के लाले हैं, मां का इलाज कैसे कराएंगे। समझ नहीं आ रहा।

घायल महिला को यूपी डॉयल-100 की गाड़ी से अस्पताल भेजा था। घायल पति की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे पुलिस गाड़ी से अस्पताल ले जाया जा सके। इसलिए एंबुलेंस का इंतजार किया गया।
राजेंद्रधर द्विवेदी, सीओ, कोतवाली

36 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंचने की बात गलत है। ग्रीनपार्क से 108 एंबुलेंस को सुबह 8:49 बजे कॉल की गई। 8:55 बजे एसीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव की कॉल भी आई। उर्सला से 9:01 बजे एंबुलेंस भेजी गई थी, पर तब तक गुब्बारे वाले की मृत्यु हो गई थी। उसे तुरंत उर्सला फिर हैलट ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया।
अजय यादव, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, 108 एंबुलेंस

बहराइच में आरटीआइ कार्यकर्ता पर बमों से हमला, नौ घायल

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के कारण सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बाद भी अपराधी नियंत्रण में नहीं हैं। बहराइच में देहात कोतवाली क्षेत्र के नदौना में आज देर रात आरटीआई कार्यकर्ता पर बमों से हमला किया गया। इस हमले में पांच महिलाओं समेत नौ लोग घायल हो गए। चिकित्सकों ने एक की हालत गंभीर देख उसे लखनऊ रेफर कर दिया है।

एसपी सालिकराम वर्मा ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के नदौना के ओम प्रकाश (37) पुत्र जगराम ने गांव में चल रहे विद्यालय से छात्रवृति के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी।

इसी बात को लेकर विद्यालय प्रबंधक राजकुमार यादव से उनकी रंजिश चल रही थी। आज गांव में आयोजित एक मांगलिक कार्यक्रम में दोनों पक्ष मौजूद थे। इस दौरान आरटीआइ कार्यकर्ता से प्रबंधक की कहासुनी हो गई। इसके बाद प्रबंधक पक्ष हमलावर हो गया। कई राउंड गोलीबारी हुई, हथगोले चलाए गए।

इस गोलाबारी में कलावती (50), संदीप(21), रेखा वर्मा(30), मनोज (25), संगीता(25), रामावती (40), पूनम(30), श्याम बिहारी(62) गंभीर रूप से घायल हो। सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ओमप्रकाश की हालत गंभीर देख उसे ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। गांव में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

सपा के इस बागी नेता ने डिंपल पर लगाए ये बेहद गंभीर आरोप, अखिलेश की बढ़ाई टेंशन!

phpThumb_generated_thumbnailसीतापुर:यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के नजदीक आते-आते सियासी पारा जितना उफान पर है, उतना ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो चला है। नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला और तेज कर दिया है। खासकर पार्टियों से बाहर किये गए बागियों की जुबान आजकल दो धारी तलवार जैसी चल रही है। ऐसा ही गंभीर आरोप लगाने का वीडियो तब सामने आया जब नामांकन का दौर समाप्त हो गया। एक वर्ष पहले समाजवादी पार्टी से बाहर किये गए विधायक रामपाल यादव पहले भी अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने डिंपल यादव को निशाने पर लिया है और उनके चुनाव में भारी पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
डिंपल पर लगाए आरोप
रामपाल यादव इस बार लोकदल से सेउता विधानसभा से प्रत्याशी हैं और उन्होंने दो दिन पूर्व सेउता में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान रामपाल यादव ने सीएम अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए। जिसमें उन्होंने साफ कहा कि डिंपल यादव को लोकसभा चुनाव में जिताने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी को एक होना पड़ा था। डीएम को अपनी नौकरी दांव पर लगानी पड़ी थी। तीन घंटे के लिए बिजली बंद कर दी गयी थी और इस दौरान ईवीएम मशीनों को बदल कर उनमें नये सिरे से वोटिंग की गयी थी। तब जाकर डिंपल यादव को जिताया जा सका था, तब ये नौजवान कहां चले गए थे।
RAMpal-yadav-1477396649अखिलेश ने किया पिता का अपमान
रामपाल यादव ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश ने अपने एक बाप का अपमान किया है और कांग्रेस के 10 बापों को सामने ला दिया है। नेताजी ने अखिलेश से 38 सीटें मांगी थी लेकिन उनकी न सुनी गई और सुनी गयी होती तो उसमें से 30 सीटों पर जीत होती। वहीं कांग्रेस को 105 सीटें दी हैं जो कहीं से नहीं जीत रही। कांग्रेस से हाथ मिलाकर पार्टी का सत्यानाश करने की तैयारी अखिलेश यादव ने कर ली है। कांग्रेस की तुलना अजगर से करते हुए रामपाल ने कहा कि वह सबको निगल जाती है और इसी दौरान बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण भी दिया। रामपाल यादव ने साफ कहा कि मैं दो बार सपा से विधायक रहा और झीन बाबू 4 बार विधायक रहे, लेकिन उनका टिकट काट दिया गया। हम लोग मिलकर समाजवादियों को हराने का काम करेंगे।

लव मैरिज के बाद पति ने ऐसे बना दिया ‘अश्लील फिल्मों की हिरोइन’

imgres demoकरोड़पति बनने चाहत में एक पति इस हदतक गिर गया कि उसने अपनी पत्नी का ही सौदा कर दिया। पत्नी को पहले उसने बार डांसर बनाया और फिर ‘ब्लू फिल्मों की हिरोइन’ बनाकर वैश्यावृत्ति के दल-दल में उतार दिया। मामला यूपी के कानपुर शहर का है। पीड़ित महिला ने एसएसपी ने न्याय की गुहार लगाई है।

महिला ने मौत के एक घंटे पहले मां-बाप को फोन पर बताई ये बातें……

suicide_1485964663इलाहाबाद:करछना थाना क्षेत्र में बुधवार को एक विवाहिता संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी से लटकी मिली। महिला के परिजनों ने ससुरालवालों पर हत्‍या का आरोप लगाया है। एसपी यमुनापार अशोक कुमार राय ने बताया, पिता की शि‍कायत पर आरोपियों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर पति, ससुर, सास और जेठ को गिरफ्तार कर लिया गया है|

मौत के एक घंटे पहले मायके वालों को बताई थी ये बातें
– घूरपुर थाना क्षेत्र के रेरा गांव निवासी घनश्याम पाठक ने अपनी बेटी गौरी (22) की शादी करछना थाना क्षेत्र के सूरज मिश्रा से मई 2014 में की थी। गौरी के तीन महीने की एक बेटी है।
– शादी के बाद से ही गौरी को सोने की चेन और अंगूठी के लिए प्रताड़ि‍त किया जाता था।
– बुधवार की सुबह करीब 9 बजे गौरी ने मायके वालों को रो-रोकर सारी बातें बताई कि सास, ससुर, पति और जेठ मिलकर उसे पीट रहे हैं।
– इसके एक घंटे बाद सूचना मिली की गौरी ने फांसी लगा ली है।
ससुराल वालों पर हत्‍या का आरोप
– मृतका के पिता घनश्याम पाठक ने बताया, जब वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि गौरी घुटने के बल फंदे से लटक रही थी और उसके हाथ बेड पर थे।
– घनश्याम के अनुसार, उनकी बेटी किसी भी सूरत में खुदकुशी नहीं कर सकती। ससुराल वालों ने फांसी पर लटका दिया है।
– पिता की सूचना के बाद पहुंची करछना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
– एसपी यमुनापार अशोक कुमार राय ने बताया कि पिता घनश्याम पाठक की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर पति सूरज मिश्रा, ससुर कृष्णचन्द्र मिश्रा, सास व जेठ को गिरफ्तार कर लिया है।