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सुप्रीम कोर्ट पहुंचे रेप के आरोपी मंत्री गायत्री प्रजापति, गिरफ्तारी पर रोक की लगाई गुहार

रेप के आरोपी सपा नेता व यूपी सरकार में मंत्री गायत्री प्रजापति अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार, गायत्री प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई है। उनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।
लखनऊ : रेप के आरोपी सपा नेता व यूपी सरकार में मंत्री गायत्री प्रजापति अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार, गायत्री प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई है। उनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

प्रजापति का कहना है कि अदालत ने उनका पक्ष जाने बिना आदेश पारित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दायर याचिका में प्रजापति ने कहा कि बिना उन्हें नोटिस भेजे बिना और बिना उनका पक्ष जाने फैसला ले लिया गया। इसलिय उक्‍त को आदेश वापस लिया जाए। साथ ही उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग भी की है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक महिला के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार और उसकी बेटी के साथ बलात्कार की कोशिश के आरोप में बीते दिनों सरकार के वरिष्ठ मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में प्रजापति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

प्रजापति और उनके छह साथियों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम सहित बलात्कार एवं बलात्कार की कोशिश संबंधी विभिन्न धाराओं में गौतमपल्ली पुलिस थाने पर मुकदमा दर्ज किया गया। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया था कि वह इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करके आठ सप्ताह के भीतर मामले की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे।

गौर हो कि गायत्री पर 35 वर्षीय एक महिला का आरोप है कि जब वह उनसे तीन वर्ष 2014 में पहले मिली थी तो उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया। गायत्री ने पीडि़ता के कुछ आपत्तिजनक फोटो भी लिये और धमकी दी कि वह इन फोटो को सार्वजनिक कर देंगे। इस धमकी के दम पर वह दो साल तक बलात्कार करते रहे।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश ने प्रजापति को मंत्री परिषद से बर्खास्‍त कर दिया था। मगर मुलायम सिंह यादव के दखल के बाद उन्हें पुन: मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया और वे अमेठी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।

दूसरी शादी कर रहा था युवक, क्या हुआ जब सामने आ गई पहली पत्नी

लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में रविवार रात पत्नी को तलाक दिए बिना ही दूसरा ब्याह रचाने जा रहे दूल्हे को लेने के देने पड़ गए। पहली पत्नी को भनक लगी तो उसने गेस्ट हाउस पहुंचकर हंगामा किया।
पुलिस को आता देख दूल्हा स्टेज से कूदकर भाग निकला। इस बीच बाराती भी वहां से खिसक लिए। पुलिस ने शादी रुकवा दी। वधू पक्ष ने युवक पर धोखाधड़ी करके दूसरा ब्याह रचाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।

पुलिस के मुताबिक, आलमबाग विशेश्वर नगर निवासी अभिषेक तिवारी ने 2014 में कानपुर की रहने वाली युवती से हिंदू रीति रिवाज से शादी की थी। महिला का आरोप है कि शादी के बाद ससुराल आने पर सास ने उसके जेवर अपने पास रख लिए।

इसके बाद दहेज में आठ लाख रुपये न लाने पर उसकी बेरहमी से पिटाई करके खदेड़ दिया। किसी तरह महिला कानपुर पहुंची और घरवालों को आपबीती बताई। महिला ने पति समेत ससुरालीजनों पर दहेज प्रताड़ना व मारपीट समेत गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवाद कोर्ट में विचाराधीन था।

इस बीच अभिषेक तिवारी के घरवालों ने पीजीआई इलाके की रहने वाली युवती से दूसरा ब्याह तय कर दिया। शनिवार को युवक की दूसरी शादी की तैयारियां चल रही थी। वृंदावन के गेस्ट हाउस में बारात पहुंच गई। इसकी जानकारी पहली पत्नी को लगी तो वह मामले की शिकायत लेकर थाने पहुंची।

महिला एसएसआई बलवंत शाही फोर्स संग गेस्ट हाउस पहुंचे तो वहां अफरातफरी मच गई। पहली पत्नी को देखकर दूल्हा स्टेज से कूदकर भाग निकला। वहीं, बाराती भी धीरे-धीरे वहां से भाग निकले।

पुलिस ने दूल्हे के भाई को हिरासत में लेकर थाने आई है। लड़की वालों ने युवक पर धोखे से दूसरा ब्याह रचाने का आरोप लगाते थाने में तहरीर दी है। इंस्पेक्टर जैनुद्दीन अंसारी ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।

वसूली की रकम के बंटवारे को लेकर भिड़े पुलिस वाले, देखें तस्वीरें

police_1466945800एक तरफ लगातार यूपी पुलिस को बेहतर और पब्लिक फ्रेंडली बनाने की बातें की जा रही हैं तो दूसरी तरफ पुलिसकर्मी अपनी हरकतों से लगातार पूरे महकमें को शर्मसार कर रहे हैं।

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ऐसी ही एक घटना की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर नजर आ रही हैं। जहां वसूली की रकम बांटने को लेकर पुलिस वाले एक दूसरे से भिड़ रहे हैं।
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एक पुलिस वाले को मिलकर तीन अन्य डंडे और लात-घूंसों से पीट रहे हैं। ये तस्वीरें पूरे पुलिस महकमें को शर्मसार करने के लिए काफी है।

लखनऊ में बोलीं स्मृति ईरानी, नौजवान तय करें कौन है पढ़ा-लिखा

नौजवान तय करें कि भारत माता के टुकड़े करने वाले शिक्षित हैं या जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपी गरीयसी बोलने वाले?

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने ये बात शुक्रवार लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित संगोष्ठी में कही।

स्मृत‌ि ने कहा, कुछ अंग्रेजी पढ़े बुद्धिजीवी भारतीय शिक्षा पद्धत‌ि को संस्कृत का गुणगान कहते हैं तो कुछ पत्रकार इसे भगवाकरण पर इससे शिक्षा में संस्कार भरने के लिए उठे कदम रुकने वाले नहीं हैं।

स्मृत‌ि ने यूथ इन एक्शन द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय और भारतीय शिक्षा पद्धति पर व्याख्यान दिया।

संगोष्ठी के दौरान स्मृत‌ि ईरानी ने कहा, केंद्र की योजनाएं यूपी में जमीन पर नहीं उतर रहीं। साथ ही उन्होंने यूपी में महिला सुरक्षा पर भी चिंता जताई। स्मृत‌ि ने डीम्ड यूनीवर्स‌िटी के लिए भी कई मानकों की घोषणा की।

विधान भवन के सामने वित्तविहीन शिक्षकों का धरना आज

04_09_2015-teacherलखनऊ। सरकार से मानदेय की मांग कर रहे वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक आज विधान भवन के सामने धरना देंगे। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के बैनर तले इस धरने में सभी जिलों के शिक्षक शामिल होंगे।
वित्तविहीन शिक्षक महासभा के कार्यवाहक अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने 2012 के चुनाव घोषणा पत्र में इंटरमीडिएट तक बिना सरकारी अनुदान के पढ़ाने वाले शिक्षकों को जीविकोपार्जन के लिए मासिक मानदेय देने का वादा किया था। सरकार अपने वादे से मुकर गई है। अगर सरकार वित्तविहीन शिक्षकों को आज मानदेय देने की घोषणा नहीं करती है तो शिक्षक धरने पर बैठ जाएंगे और मांग पूरी होने तक नहीं हटेंगे। महासभा के प्रदेश महासचिव और मीडिया समन्वयक अजय सिंह एडवोकेट ने कहा कि इस साल यूपी बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का बहिष्कार वित्तविहीन शिक्षकों ने इसी आश्वासन पर खत्म किया था कि छह महीने के भीतर उन्हें मानदेय देने का फैसला कर लिया जाएगा। छह महीने बीतने के बाद भी सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया है।
राजकीय शिक्षक आज निकालेंगे मोमबत्ती जुलूस
शिक्षा विभाग में काडर डिवीजन के विरोध में और सरकारी कर्मचारियों की तरह सुनिश्चित करियर प्रोन्नयन (एसीपी) का लाभ दिए जाने की मांग को लेकर राजकीय शिक्षक संयुक्त मोर्चा शुक्रवार को राजधानी में हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा से मोमबत्ती जुलूस निकालेगा।
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक का धरना और जुलूस आज
पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, पदोन्नत शिक्षकों को न्यूनतम वेतन देने समेत अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन शुक्रवार को राजधानी के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना प्रदर्शन करेगा। धरना के बाद एसोसिएशन के सदस्य विधान भवन तक पैदल जुलूस निकालेंगे। इस सिलसिले में गुरुवार को दारुलशफा में हुई एसोसिएशन की बैठक हुई।

अब कॉम्प्लान के पैकेट में निकले कीड़े, कंपनी को नोटिस

13_06_2015-complanलखनऊ। लखनऊ निवासी शालिनी सिंघानिया ने जब शनिवार को बच्चों के हेल्थ ड्रिंक कॉम्प्लान का नया पैकेट खोला तो उसमें सफेद व काले रंग के कीड़े दिखने लगे। पैकेट पर निर्माण की तारीख भी फरवरी 2015 की पड़ी है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंत गुप्ता ने मौके पर पहुंच कर कॉम्प्लान का नमूना सील कर दिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंत गुप्ता ने बताया शालिनी की शिकायत पर वह पहुंचे थे। यह पैकेट उनका नौकर खरीद कर लाया था। नौकर घर पर नहीं था इसलिए पता नहीं चल सका कि पैकेट कहां से खरीदा गया था। उन्होंने कहा कि पैकेट में कीड़े थे और दूध में डालने वह ऊपर आ गए। नमूना जांच के लिए भेजा गया है। निर्माता हेंज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उधमपुर को ई-मेल के जरिए नोटिस भेज दिया गया है। यह स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए जल्द ही अभियान चलाकर कॉम्प्लान के नमूने लिए जाएंगे। कंपनी को भी जांच कराने को कहा गया है।

लखनऊ में गाय कटी मिलने के बाद बवाल, लाठीचार्ज

10_06_2015-10-06-up-3लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पीजीआइ थाना क्षेत्र में आज एक कटी गाय मिलने के बाद से कुछ लोगों ने बवाल शुरू कर दिया। मृत गाय के पास ही एक बछड़ा भी मरा पड़ा था। इस घटना के बाद लोगों ने काफी आक्रोश व्यक्त किया। पुलिस ने इनको लाठीचार्ज के बाद भगा दिया।
पीजीआई थाना क्षेत्र के वृन्दावन कालोनी के गेट पर आज सुबह लोगों ने एक कार पर सवार तीन लोगों को गाय काटते देखा। इन लोगों ने जब शोर मचाया, तो यह लोग गाय तथा कार को छोड़कर भाग गये। गाय को कई टुकड़ों में काटा गया था, पास में ही एक मृत बछड़ा भी पड़ा था। माना जा रहा है कि बछड़ा गाय का पेट फाड़कर निकाला गया था। जहां पर गाय को काटा जा रहा था, वहीं पर करीब दो दर्जन मीट की दुकान भी हैं। यह सब अवैध रूप से खुली हैं।

दूसरी शादी रचाने वाला दारोगा ड्यूटी से गायब

22_05_2015-22-5up_4लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दारोगाओं की अनुशासनहीनता चरम पर है। प्रतापगढ़ में तैनात दारोगा ज्ञानेन्द्र सिंह कानपुर में एक युवती से दूसरी शादी करने के बाद से गायब है। उसके खिलाफ कानपुर में मामला भी दर्ज है।
ïप्रतापगढ़ पुलिस लाइन में तैनात कानपुर की युवती से दूसरी शादी रचाने वाले एसआइ ज्ञानेंद्र सिंह पर कार्रवाई होनी तय है। ज्ञानेन्द्र हफ्ते भर से वह पुलिस लाइन से गैर हाजिर चल रहे हैं। देवसरा एसओ रहे ज्ञानेंद्र सिंह महीने भर पहले सपा नेता की पिटाई के मामले में लाइन हाजिर थे।
दो वर्ष पहले कानपुर देहात जिले में तैनाती के दौरान एसआइ ज्ञानेंद्र सिंह का नवीननगर की रहने वाली ईशा से संपर्क हो गया और 10 मार्च 2013 को ज्ञानेंद्र ने ईशा से शादी कर लिया। 20 दिन पहले ईशा को यह मालूम हुआ कि ज्ञानेंद्र पहले से शादीशुदा है और उसकी पत्नी भी है। यह बात उसने मायके जाने के बाद मां विनीता सचान को बताई। विनीता का कहना है ज्ञानेंद्र 17 मई को उसके घर पहुंचे। 18 मई को कुष्मांडा देवी मंदिर जाने की बात कहकर ईशा को बेटी के साथ लेकर ज्ञानेंद्र निकले। इसके बाद से दोनों का पता नहीं चल रहा है। इस मामले में विनीता ने काकादेव थाने में (कानपुर) मुकदमा भी दर्ज कराया है। पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर ज्ञानेंद्र के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। एसपी बलिकरन सिंह यादव इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
इस साल 7 फरवरी को ज्ञानेंद्र को देवसरा थाने का एसओ बनाया गया था। पिछले महीने अमरगढ़ के रहने वाले सपा नेता अरङ्क्षवद यादव को हिरासत में लेकर देवसरा थाने में रखा गया। आरोप है कि वहां ज्ञानेंद्र, दारोगा सियाराम वर्मा ने अरङ्क्षवद को मारा पीटा था। 11 अप्रैल की रात सपाइयों ने थाने का घेराव कर दिया था। अगले दिन ज्ञानेंद्र तथा सियाराम को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया था। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में छुट्टी लेकर ज्ञानेंद्र पुलिस लाइन से गए है। उन्हें 13 मई को लौट आना था, लेकिन अभी तक वे लौटे नहीं है। यहां पुलिस लाइन में ज्ञानेंद्र गैर हाजिर चल रहे हैं। इस बाबत पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक पीके थापा का कहना है कि एसआइ ज्ञानेंद्र अप्रैल के आखिरी हफ्ते में छुट्टी पर गए हैं। 14 मई से वह गैर हाजिर चल रहे हैं।

प्रदेश में मौसम ने ली करवट, तेज हवाएं व बारिश जारी

13_05_2015-mausamलखनऊ। प्रदेश में बुधवार सुबह अचानक मौसम में बदलाव नजर आया। सुबह से चारो तरफ बादल और आंधी ने प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया। जिससे मौसम खुशनुमा हो गया। पिछले कई दिनों से चली आ रही गर्मी से लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं मौसम विभाग ने कहा है कि पश्चिमी यूपी में तेज बारिश हो सकती है। जबकि मध्य व पूर्वी यूपी में रिमझिम बारिश के आसार हैं।
मौसम में आए बदलाव से प्रदेश के कई जिलों में जहां सुबह से रिमझिम बारिश शुरू हो गई तो कहीं पर आंधी भी आई। जिससे गर्मी के मौसम में राहत मिली। बुंदेलखंड के कई जिलों में तो ओले गिरने की भी सूचना रही। वहीं कई अन्य जिलों में ठीकठाक पानी बरसा। जगह बारिश शुरू ओले भी गिरे कहीं

एसओ ने महिला ‌सिपाही को दिखाई अश्लील क्लिप

mms-538ea4dd7339a_exlstविभूति खंड थाने में महिला कांस्टेबल को अश्लील क्लिप दिखाकर छेड़खानी के मामले में विशाखा कमेटी ने तत्कालीन एसओ पंकज सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।

प्रभारी एसएसपी ने इंस्पेक्टर विभूति खंड को मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश के आदेश दिए हैं। अश्लीलता के आरोपी एसओ पंकज सिंह का तबादला कर अफसरों ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

पुलिस के मुताबिक, विभूति खंड थाने में तैनात एक महिला कांस्टेबल ने जनवरी 14 में एसओ पंकज सिंह की करतूत को फेसबुक पर उजागर किया था।

आरोप था कि एसओ पंकज सिंह ने उसे अपने कक्ष में बुलाकर मोबाइल पर अश्लील क्लिप दिखाई। इस मामले में ठोस कार्रवाई के बजाय तत्कालीन एसएसपी ने सीओ बबिता सिंह को जांच सौंपी।

मामला तूल पकड़ने पर पंकज सिंह को हटा दिया गया। कुछ दिनों बाद उसका बाराबंकी तबादला कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अपमान से क्षुब्ध महिला कांस्टेबल ने आला अफसरों से शिकायत की।

मामले की जांच विशाखा कमेटी को सौंप दी गई। उन्नाव की तत्कालीन एसपी सोनिया सिंह, तत्कालीन सीओ कैंट बबिता सिंह समेत तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच के बाद पंकज सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की।

सूत्रों का कहना है कि मुकदमे की सिफारिश की भनक लगने पर पंकज सिंह के करीबी लोगों ने एसएसपी से पैरवी की और विभूति खंड पुलिस कई दिन से रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही थी। इससे आहत महिला कांस्टेबल ने एसएसपी यशस्वी यादव के हटते ही उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई।

इस पर डीआईजी/प्रभारी एसएसपी आरके चतुर्वेदी ने विशाखा कमेटी की सिफारिश की फाइल तलब की और इंस्पेक्टर विभूति खंड को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बावजूद विभूति खंड पुलिस ने रात तक रिपोर्ट नहीं लिखी थी।

सरकार के लिए बोझ बन गए थे SSP, इसलिए हटाए गए

ssp-yashshvi-yadav-on-cycle-track-5502f2f953f1c_exlstसरकार के लिए बोझ बन चुके एसएसपी यशस्वी यादव को आखिरकार शुक्रवार शाम राजधानी से हटा दिया गया। उन्हें डीजीपी ऑफिस से संबद्ध किया गया है। नये एसएसपी की तैनाती तक फिलहाल डीआईजी आरके चतुर्वेदी को राजधानी का कामकाज संभालेंगे।

यशस्वी यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। महाराष्ट्र में तैनाती के दौरान भी उनके साथ कई विवाद जुड़े रहे। सपा की सरकार बनने के बाद वह प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश आए और कानपुर का एसएसपी बनाए गए। यहां भी उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन करके सरकार के खिलाफ ही मोर्चे खुलवा दिए।

सपा विधायक इरफान सोलंकी और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के बीच मारपीट के मामले में उनकी एकतरफा कार्रवाई से भारी विरोध पैदा हो गया। उन पर डॉक्टरों को मैनेज करने के लिए सवा करोड़ रुपये का ऑफर देने का भी आरोप लगा।

उन्होंने विवादित स्टिंग ऑपरेशन भी किए जिससे सरकार और पुलिस की बदनामी हुई। उर्सला अस्पताल में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर गिरफ्तार किए गए डॉक्टर को बीते दिनों कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया था।

कानपुर से कोर्ट के आदेश पर एसएसपी को हटाकर डीजीपी ऑफिस से संबद्ध किया गया था। बीती चार दिसंबर को यशस्वी यादव को राजधानी की कमान सौंपी गई लेकिन यहां भी उन्होंने मनमाने और निरंकुश तरीके से काम करके विवादों को हवा दी।

तैनाती के तत्काल बाद एक पूर्व राज्यमंत्री के इशारे पर उन्होंने स्पोर्ट्स असलहों के कारोबारी तारिक को विदेशी असलहों का सौदागर बताते हुए गिरफ्तार कराकर जेल भेज दिया।

राजधानी में भरी दोपहरी डालीगंज के एचडीएफसी बैंक के एटीएम बूथ पर तीन युवकों की हत्या कर 50.50 लाख लूटने की वारदात में कोई सुराग नहीं मिला तो यशस्वी यादव ने तेलंगाना में मारे गए सिमी के आतंकियों से इनका कनेक्शन जोड़कर एक नई थ्योरी गढ़ डाली।

एसएसपी ने वारदात को आतंकियों के मत्थे मढ़ने का पूरा प्रयास किया। मामले ने तूल पकड़ा तो उन्होंने तेलंगाना पुलिस के हवाले से यह बयान जारी होने की बात कहकर पल्ला झाड़ दिया। बाद में एटीएम लूटकांड में आंतकी कनेक्शन की थ्योरी फर्जी निकली।

इसी तरह गौरी हत्याकांड में आला अधिकारियों के मना करने के बावजूद एसएसपी ने निर्दोष अनुज गौतम को जेल भेज दिया था। बाद में पुलिस ने खुद अनुज को जेल से बाहर निकलवाया।

खबरें लिखने पर मीडियाकर्मियों को फंसाने की साजिशें रचीं
एसएसपी की कारगुजारियों की मीडियाकर्मियों ने खबरें छापीं तो यशस्वी यादव ने उन्हें भी दबाव में लेने की कोशिश की। फर्जी मामलों में मीडियाकर्मियों को फंसाया गया।

मीडियाकर्मियों ने एसएसपी की शिकायत आला अफसरों से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसएसपी की मनमानी की मीडियाकर्मियों ने सीएम अखिलेश यादव से भी शिकायत की थी।

एसएसपी यशस्वी यादव खुद को सीएम अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का करीबी बताते थे। यही कहकर वह अपने आला अफसरों को नजरअंदाज करते थे। आईजी-डीआईजी से उनकी तनातनी किसी से छिपी नहीं थी।

बैठकों में वह अपनी जगह दूसरे अफसरों को भेजते थे। कई बार आला अफसरों ने उनकी इस आदत पर नाराजगी भी जताई। एक बार तो आईजी ने एसएसपी के न आने पर बैठक ही निरस्त कर दी थी।

पुलिस महकमा भी खुश, कानपुर की टीम रहेगी निशाने पर
एसएसपी के हटने की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में खुशी की लहर दौड़ गई। कानपुर से आए कुछ लोगों को छोड़कर बाकी पुलिसकर्मी इस खबर से खासे उत्साहित दिखे। नये एसएसपी के नाम पर भी कयास लगते रहे।

दरअसल, यशस्वी यादव का अपने स्टाफ के प्रति भी रवैया बहुत अच्छा नहीं था। उन्हें राजधानी के पुलिसकर्मियों पर भरोसा नहीं था। यही वजह थी कि उन्होंने कानपुर में तैनात एएसपी रोहित मिश्रा, मनोज सोनकर और मनीलाल, सीओ अवनीश कुमार मिश्रा के अलावा कई इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर को राजधानी बुलवा लिया था। यशस्वी के जाने के बाद यह पुलिस अफसर नये एसएसपी के निशाने पर रहेंगे।

18 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाना चाहती है सरकार

smart-city-54e4d2972b9d3_exlstराज्य सरकार प्रदेश के 18 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाना चाहती है। नगर विकास विभाग ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को शहरों के नाम के साथ उनकी खूबियों के बारे में बताते हुए पहले ही प्रस्ताव भेज दिया है।

अब केंद्र को तय करना है कि वह प्रदेश के कितने शहरों को पहले चरण में स्मार्ट सिटी बनाना चाहता है। उल्लेखनीय है, केंद्र सरकार ने देश के सौ शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का फैसला किया है।

स्मार्ट सिटी परियोजना में शहरों का कायाकल्प किया जाएगा। नगर विकास विभाग की जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर, आगरा, मेरठ, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, बरेली, अलीगढ़, झांसी, गोरखपुर, सहारनपुर, फीरोजाबाद, अयोध्या, रामपुर व मुजफ्फरनगर को स्मार्ट सिटी बनाना चाहती है।

स्मार्ट सिटी योजना में केंद्र सरकार परियोजना की कुल लागत का 90 फीसदी देगी। राज्य सरकार को 10 फीसदी खर्च करना होगा। इसमें 5 प्रतिशत राज्य सरकार देगी और इतना ही संबंधित निकाय खर्च करेगा।

जानकारों के मुताबिक परियोजना 15 साल की आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। योजना के लिए भूमि व्यवस्था पर आने वाले खर्च को परियोजना लागत में ही शामिल कर केंद्र सरकार से इसे लिया जाएगा।

स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होने वाले शहर के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तकनीकी रूप से दक्ष संस्थाओं से तैयार कराई जाएगी।

स्मार्ट सिटी में होंगे ये काम
इस परियोजना में शहरों को सभी सुविधाओं से युक्त किया जाएगा। लोगों को बेहतर ट्रांसपोर्ट की सुविधा देने के लिए सिटी बस चलाने व इसके रख-रखाव को वर्कशॉप व डिपो बनाए जाएंगे।

शहरियों के लिए बेहतर पेयजल आपूर्ति, सीवर व जल निकासी की व्यवस्था होगी। शहरों में जरूरत के आधार पर सड़कें, आधुनिक कूड़ाघर और सड़क के किनारे सार्वजनिक शौचालय बनवाए जाएंगे।